संवाद न्यूज एजेंसी
मंडी गोबिंदगढ़। लोहा स्क्रैप से भरी गाड़ियों की पासिंग मामले में फंसे पंजाब के डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर के मामले के बाद मंडी गोविंदगढ़ का लोहा कारोबार एक बार फिर बदनाम होने लगा है। कारोबारियों का कहना है कि इसका कारण सरकार और उसकी बनाई गई जीएसटी कमेटी की नाकामी है।
मंडी गोबिंदगढ़ लोहा एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने बताया कि करीब 12 वर्ष पहले पंजाब में प्रकाश सिंह बादल सरकार के समय स्क्रैप पर एक फीसदी वैट लगता था। एक्साइज ड्यूटी 12:50 रुपये लगती थी। इसमें कोई गड़बड़ी नहीं थी। लेकिन केंद्र सरकार द्वारा 2017 में जीएसटी लागू की गई और स्क्रैप पर टैक्स एक फीसदी से 18 फीसदी जीएसटी के रूप में हो गया। इसकी वजह से दो बिचौलिए बीच में आ गए। एक स्क्रैप से भरी गाड़ी को पासिंग करवाने वाला और दूसरा उसका फर्जी बिल तैयार करने वाला फर्जी बिलर। अहम बात यह है कि जब घरो से स्क्रैप लिया जाता है तो उसका बिल कैसे लाया जाए। घरों से एकत्र होने वाली स्क्रैप में टीन, पत्ती, पुरानी स्क्रैप को लोहा व्यापारी खरीद लेता है लेकिन वह घरों से खरीदी गई स्क्रैप का बिल कहां से लाए। घरों से एकत्र स्क्रैप फर्नेस में भेजा जाता है तो रास्ते में जीएसटी विभाग का मोबाइल विंग स्क्रैप का बिल मांगता है। इससे फर्जी बिल का कारोबार फल फूल रहा है।लोहा संगठन के एक प्रवक्ता ने बताया कि सरकार यदि जीएसटी के झमेले को दूर करना चाहती भी है तो ब्यूरोक्रेसी उसे सही होने नहीं दे रही।
यही कारण है कि लोहा कारोबारी घरों से एकत्र की जाने वाली स्क्रैप पर मिलने वाले एक फीसदी वैट को खत्म करने और 18 फीसदी जीएसटी लागू किए जाने को पिछले 10 वर्ष से कोस रहे हैं। मंडी गोबिंदगढ़ लोहा एसोसिएशन के एक प्रवक्ता ने बताया कि ब्यूरोक्रेट्स नहीं चाहते हैं कि यहां लोहे का कारोबार ईमानदारी से हो। उन्होंने बताया कि मंडी गोबिंदगढ़ का अधिकतर कारोबार यूएई, यूक्रेन, रूस के साथ कई देशों से आयात किए गए स्क्रैप पर निर्भर है। यह स्क्रैप कंटेनरों से लुधियाना के ड्राई पोर्ट पर ट्रेन से आते हैं।