जीएसटी लागू होने के बाद कारोबारियों को जोर का फटका लग रहा है, वो भी इस तरह से। समाधान चाहे कुछ भी हो जाए, एक बार नुकसान तो हो ही जाएगा। दरअसल, हरियाणा के कारोबारियों का करोड़ों रुपये का माल अभी गोदामों में पड़ा है।
इस माल पर वे पहले ही संबंधित टैक्स अदा कर चुके हैं, लेकिन यह माल अब बिकने के लिए गोदामों से बाजार तक आया तो इन कारोबारियों को जीएसटी अदा करना पड़ेगा। इससे दवा कारोबारी ज्यादा प्रभावित होंगे। इससे जहां सूबे के कारोबारियों, उद्यमियों और ट्रेडर्स में बेचैनी का माहौल है,
वहीं आर्थिक मामलों के जानकारों की माने तो अब कारोबारियों को खासा नुकसान झेलना पड़ेगा। हरियाणा केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के चीफ एडवाइजर सतीश विज के अनुसार, हरियाणा में करीब 15 हजार केमिस्ट संचालक हैं, जिनके पास औसतन 2.50 लाख प्रति कारोबारी का माल स्टॉक में पड़ा है।
दवा कारोबारियों का 25 लाख् का माल गोदामों में
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इसके अलावा प्रदेश में करीब पांच हजार दवा के बड़े कारोबारी (सीएंडएफ) हैं, जिनके पास औसतन प्रति कारोबारी 25 लाख का माल गोदामों में पड़ा है। उन्होंने बताया कि इस माल पर कारोबारी पहले टैक्स अदा कर चुके हैं, लेकिन यह अब तक बिक नहीं पाया है, लिहाजा उन्हें जीएसटी भी अदा करना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि रिटेल दवा कारोबारियों को इससे ज्यादा नुकसान होगा। उनके अनुसार, गोदामों में पड़े 15.25 अरब के दवाओं के स्टॉक को यदि मार्केट में बेचना है तो लिहाजा उन्हें जीएसटी अदा करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि औसतन दवाओं के इस स्टॉक पर दवा कारोबारियों को जीएसटी अदायगी के रूप में 1.83 अरब का फटका लगेगा।
उधर, एसएमई फार्मा इंडस्ट्रीज फेडरेशन के सीनियर वाइस चेयरमैन गुरुदत्त छिब्बर के अनुसार, हालांकि बड़े दवा उद्यमियों थोक कारोबारियों को बचे स्टॉक पर कुछ मदद करने का आश्वासन दिया है। इसके बावजूद भी नुकसान तो होगा, खासकर छोटे रिटेलर को ज्यादा झटका लगेगा।
इन कारोबारियों को धीरे से लगेगा जोर का फटका
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हरियाणा में कई प्रकार के छोटे ट्रेडर्स भी फटके की जद में आएंगे। थोक ट्रेडर्स प्रवीण मित्तल के अनुसार, सूबे में बड़ी संख्या में थोक कारोबारियों ने ऐसे माल का अच्छा खासा स्टॉक जमा कर रखा है, जिस पर टैक्स बढ़ गया है। इस माल पर कारोबारी पहले टैक्स दे चुके हैं और अब नए कर प्रणाली से जीएसटी देना पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि इन कारोबारियों में चीनी, घी, पैक्ड चीज, चॉकलेट, कोल्ड ड्रिंक, कास्मेटिक्स, डायबीटिक फूड्स, सौंदर्य एवं प्रसाधन, बादाम, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, नमकीन भुजिया, हेयर ऑयल, कॉफी, पेंट कारोबारी इत्यादि व्यवसायी शामिल हैं।
उनके अनुसार, हरियाणा में इस तरह के कारोबारियों के पास भी करीब 1.30 अरब से अधिक का स्टॉक पड़ा है। जिस पर उन्हें बेचने के लिए अब जीएसटी देना होगा। उन्होंने बताया कि इन व्यापारियों को औसतन 15.60 करोड़ का नुकसान होगा।
नार्थ इंडिया में कपड़े की सप्लाई ठप
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उधर, जीएसटी को लेकर कपड़ा कारोबारियों का गुस्सा भी बरकरार है। हरियाणा, पंजाब, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर तक सूरत, कोलकाता, दिल्ली और अहमदाबाद से कपड़ा सप्लाई किया जाता है। इन राज्यों में कपड़ा कारोबारी हड़ताल पर हैं, लिहाजा यहां कपड़ों की सप्लाई ठप पड़ी है।
हरियाणा क्लॉथ ट्रेड फेडरेशन के अध्यक्ष दिनेश ग्रोवर ने बताया कि उतर भारत में इस समय कपड़े की सप्लाई बंद है। क्योंकि जीएसटी के खिलाफ कपड़ा निर्माता कारोबारियों का आंदोलन जारी है। उन्होंने बताया कि कारोबारी इस कर प्रणाली पर पुन: विचार करने की मांग कर रहे हैं। क्योंकि कपड़ा पहले कर के दायरे से बाहर था।
उनके अनुसार, कपड़ा कारोबारियों की मांग है कि यदि कपड़े पर कर लगाना है तो इस पर सीधे टैक्स लगाने के बजाय बेसिक यार्न, कपडे़ पर केमिकल प्रिंटिंग, सर्विस इत्यादि पर मामूली कर लगाया जाए। पांच फीसदी टैक्स से काफी परेशानी उद्यमियों व कारोबारियों को होगी।