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'जोहरा को खुश रखने की जिम्मेदारी मिली थी मुझ़े'

Fri, 11 Jul 2014 12:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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वो जब हंसती तो मेरी सांस में सांस आती, उनकी आंखों में बच्चों जैसी चमक हमेशा दिखाई देती। भारतीय फिल्म जगत और रंगमंच का बड़ा नाम जोहरा सहगल अब हमारे बीच नहीं हैं पर उनकी यादें हमेशा मेरे साथ रहेंगी। यह कहना है चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के चेयरमैन जीएस चन्नी का।
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जोहरा को खुश रखने की जिम्मेदारी थी

चन्नी ने कहा कि चंडीगढ़ में वर्ष 1973 में बलवंत गार्गी ने मिर्जा साहिबा का मंचन किया। इसी मंचन के दौरान बॉलीवुड और रंगमंच कर्मी जोहरा सहगल भी आईं थीं।

चन्नी ने कहा कि इंडियन थिएटर डिपार्टमेंट के फाउंडर डायरेक्टर थे और उन्होंने सिर्फ उनको एक काम सौंपा था कि जोहरा सहगल को खुश रखना है।

अकसर देता था गुलाब के फूल

जीएस चन्नी ने बताया कि इसी दौरान इंडियन थिएटर पंजाब यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल फोक थिएटर वर्कशाप का आयोजन भी किया गया। जिसमें बॉलीवुड एक्ट्रेस किरण खेर, ओम शिवपुरी जैसे स्टार भी मौजूद थे। उन्होंने बताया कि जोहरा सहगल पंजाब यूनिवर्सिटी के सर्किट हाउस में ठहरी थीं। उनको अक्सर वह गुलाब का फूल देते थे।
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जोहरा को खुश रखने के तरीके खोजता था

जोहरा सहगल को कॉफी पसंद थी, अक्सर खाली बैठतीं तो कॉफी मंगवा लेतीं। जीएस चन्नी ने कहा कि जोहरा सहगल को खुश करने के लिए वह रोज नए तरीके सोचते थे।

उनको अच्छा लगता था कि जब कोई चीज जोहरा सहगल को देते थे तो उनकी आंखों में चमक आती। चन्नी ने कहा कि जोहरा सहगल जैसी स्टार की कमी पूरी नहीं की जा सकती है।
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