कुरुक्षेत्र। पिछले छह माह में पंचायती भूमि पर काबिज होने वाले भू-माफिया का दबदबा बढ़ा है और प्रशासन की अनदेखी से इनके हौसले बुलंद हैं।
अवैध रूप से पंचायती भूमि पर कब्जा करने वालों का प्रत्यक्ष प्रमाण गांव मथाना में देखा जा सकता है, इससे प्रशासनिक अधिकारी भी वाकिफ है, लेकिन अवैध कब्जे करने वालों पर कार्रवाई नहीं हो रही है।
करीब छह माह से बीडीपीओ थानेसर और लगभग चार महीने से यह मामला डीडीपीओ के संज्ञान में है, लेकिन कार्रवाई न होने से गांव की कई एकड़ जमीन व जोहड़ अवैध कब्जाधारियों की भेंट चढ़ चुका हैं और जिला प्रशासन मूक दर्शन बनकर भू-माफिया को बढ़ावा देने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रहा।
ग्रामीण संजीव, मंदीप, सुमेर सिंह ने कहा कि पिछले काफी समय से लगातार पंचायती जगह पर अवैध कब्जे हो रहे हैं, लेकिन अधिकारियों को मामले की जानकारी होते हुए भी अव्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ। यह हालात तब है जब सरपंच को लगभग एक वर्ष से भी अधिक समय से इसकी जानकारी है।
ग्रामीणों द्वारा इस समस्या को लेकर बीडीपीओ थानेसर कार्यालय में गत 5 मार्च को पत्र क्रमांक नंबर-526 और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय में 29 अप्रैल को पत्र क्रमांक नंबर-3003 के तहत शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन इतना समय बीतने पर भी अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली का आलम बदस्तूर जारी है।
कुछ भी बोलने को तैयार नहीं सरपंच मथाना
गांव मथाना के सरपंच अशोक कुमार से पंचायती जोहड़ को कुछ लोगों द्वारा रोके जाने के संबंध में बात की गई तो इस दौरान वे सवालों के जवाब देने से बचते नजर आए। समस्या के बारे में पूछे गए सवालों पर सरपंच ने पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी, जिससे साफ जाहिर होता है कि मामला गड़बड़ है।
पंचायती जगह दबाना गलत, हो कड़ी कार्रवाई: पूर्व सरपंच
पूर्व सरपंच तेजपाल का कहना है कि वे पंचायती जगह पर अवैध कब्जे के पक्ष में नहीं है। उन्होंने बताया कि वे हमेशा ही ऐसे अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि पंचायती जगह को रोकने वाले अवैध कब्जाधारियों पर जिला प्रशासन सख्त कार्रवाई करे। ग्रामीण मंदीप कुमार का कहना है कि गांव की पंचायती जगह व जोहड़ पर कब्जा करने वाले कब्जाधारी सरपंच के वोट बैंक का हिस्सा हैं। इसीलिए अपने राजनीतिक फायदे को देखते हुए सरपंच ऐसे लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा और ना ही प्रशासन को इस बारे में कोई जानकारी देता। संजीव गौड़ के अनुसार प्रशासन की अनदेखी से गांव तक अवैध कार्य हो रहे हैं। यदि प्रशासन समय रहते अपने कार्यों को कानूनी नियमानुसार अंजाम दे, तो अवैध कार्याें व असामाजिक तत्त्वों पर नकेल कसी जा सकती है।