गुटबाजी से जूझ रही आम आदमी पार्टी ने पंजाब विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बागी सुरों को खामोश करने का इंतजाम कर लिया है। पार्टी की सिफारिश पर विधानसभा सचिवालय द्वारा ऐसा सिटिंग अरेंजमेंट किया गया है कि बागी सुखपाल खैरा गुट सत्र के दौरान ज्यादा मुखर ही न हो सके।
पार्टी ने खास रणनीति के तहत खैरा गुट की सीटें पीछे करवा दी हैं। विधानसभा सत्र में बैठने के लिए प्राथमिकता पार्टी विधायक दल की ओर से विधानसभा सचिवालय को दी जाती है। नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा की ओर से दी गई प्राथमिकता के आधार पर आगे की सीटों पर उनके ही बारह विधायक बैठेंगे। जबकि, खैरा गुट के आठों विधायक सबसे पीछे की सीटों पर बैठना होगा। प्राथमिकता के आधार पर ही सदन में स्पीकर विधायकों को बोलने का समय भी देंगे। इससे साफ है कि खैरा गुट के विधायकों को समय कम मिलेगा।
आप सूत्रों के मुताबिक खैरा गुट ने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इसलिए पार्टी नेतृत्व को नहीं पता कि सदन में उनका बर्ताव कैसा होगा। यह स्पष्ट नहीं है कि वे लोग पार्टी विधायकों के साथ एकजुटता दिखाएंगे या फिर अपनी डफली बजाएंगे। ऐसे में किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए उनकी सीटें ही पीछे करवा दी गई हैं। खैरा गुट जहां सदन में ज्यादा मुखर नहीं हो सकेगा, वहीं पार्टी लाइन का उल्लंघन करना भी उसके लिए आसान नहीं होगा। क्योंकि किसी भी स्थिति में पार्टी की ओर से व्हिप जारी की जा सकती है। अपनी मर्जी से खैरा गुट सदन से गैर-हाजिर नहीं हो सकेगा, बायकॉट नहीं कर सकेगा।
मीटिंग में खैरा गुट के आने पर असमंजस
नए नेता प्रतिपक्ष हरपाल चीमा ने शुक्रवार सुबह विधानसभा स्थित पार्टी कार्यालय में आप विधायक दल की बैठक बुलाई है। जिसमें खैरा गुट को भी न्योता दिया गया है। लेकिन उनके आने को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पार्टी का एक वर्ग तो यह मान कर चल रहा है कि खैरा गुट नहीं आएगा। हालांकि चीमा ने उन्हें जाल में फंसाने के लिए ही जानबूझ कर मीटिंग आगे बढ़ाई थी।