पटरी से उतरी हरियाणा रोडवेज की गाड़ी ट्रैक पर नहीं आ पा रही है। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद हर साल एक हजार बसें रोडवेज बेड़े में शामिल करने का दावा किया था, लेकिन पौने चार साल के कार्यकाल में मात्र पांच सौ बसें ही बेड़े में शामिल हो पाईं। जबकि, इससे ज्यादा बसें कंडम होकर बेड़े से बाहर हो गईं। जिससे बेड़ा बढ़ने के बजाए वही लगभग 42 सौ बसों पर अटका हुआ है।
सरकार बेड़ा बढ़ाने के अलावा रोडवेज की आय भी नहीं बढ़ा पाई। परिवहन निदेशालय के बिना होमवर्क किए फायदे वाले लंबे रूट भी बंद कर दिए गए हैं। सरकार लगभग तीन साल से निजी रूट परमिट और किलोमीटर स्कीम के भंवर से ही बाहर नहीं निकल पा रही। रोडवेज का बेड़ा बढ़ाने के बजाए निजी बस ऑपरेटरों को लाभ पहुंचाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है, जो अभी तक रोडवेज यूनियनों की एकजुटता के चलते सिरे नहीं चढ़ पाया।
सरकार रोडवेज कर्मचारियों को साधने में भी नाकाम रही है। पौने चार साल में लगभग दस बार रोडवेज का राज्यव्यापी चक्का जाम हो चुका है। इसके पीछे कारण पहले निजी रूट परमिट और अब किलोमीटर स्कीम बनी हुई है। किलोमीटर स्कीम को लेकर बीते सात अगस्त को ही चक्का जाम हुआ है। जिसमें शामिल कर्मचारियों पर सरकार कार्रवाई करने में डटी है। जिससे प्रदेश में एक बार फिर चक्का जाम के हालात बन गए हैं।
फरीदाबाद रोडवेज डिपो के कर्मचारी नेता रामआसरे यादव को निलंबित किए जाने से हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति भड़की हुई है। गुरूवार से डिपो में बसों का संचालन बंद कर दिया है। यूनियनें कर्मचारी नेता के निलंबन को रद्द कराने पर अड़ गई हैं, अगर ये अगले 24 घंटों में संभव न हुआ तो फिर प्रदेशव्यापी चक्का जाम अगले दो दिन बाद किसी भी समय हो सकता है।
इसके अलावा ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन के बैनर तले हरियाणा रोडवेज वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी पांच सितंबर को चक्का जाम की तैयारियों में पहले से जुटी हुई है। इससे सरकार को एक नहीं, आने वाले दिनों में दो-दो चक्का जाम से जूझना होगा। जिससे एक बार फिर राजस्व में आठ से दस करोड़ रुपये की चपत लगेगी। बता दें कि चक्का जाम से रोडवेज को अभी तक पचास करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
सरकार झुकने को नहीं तैयार
परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार साफ कहते हैं कि किलोमीटर स्कीम कैबिनेट का फैसला है। इसे लागू करेंगे। यूनियनों का विरोध जायज नहीं है, चूंकि रोडवेज का निजीकरण नहीं किया जा रहा। भाजपा सरकार के कार्यकाल में कर्मचारियों की दर्जनों मांगें पूरी की गई हैं।
रोडवेज को फायदे में लाना ही नहीं चाहती सरकार
हरियाणा रोडवेज कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के वरिष्ठ सदस्य इंद्र सिंह बधाना, सरबत पूनिया, ज्वाइंट एक्शन कमेटी के हरिनारायण शर्मा व बलवान सिंह दोदवा ने कहा कि सरकार के पास रोडवेज को फायदे में लाने की इच्छा शक्ति ही नहीं है। हर साल बेड़े में दो हजार बसें बढ़ाकर रोडवेज को फायदे में लाया जा सकता था। सरकार रोडवेज को घाटे से उभारने और रोजगार देने की नीति पर काम ही नहीं कर रही। जनसंख्या अनुसार 14 हजार बसें चाहिए। उनके साथ किए गए हर समझौते को सरकार ने तोड़ा है। जिससे कर्मचारियों में अविश्वास की भावना पैदा हो चुकी है।