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Ground Zero Report : हरियाणा की इन तीन सीटों पर भाजपा मोदी के सहारे, महज मंसूबों के साथ मझधार में कांग्रेस

आशीष वर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 26 Apr 2024 05:41 AM IST

सार

पिछले दो लोकसभा चुनाव में भाजपा इन तीनों सीटों पर बड़े अंतर से जीती है। पार्टी की कोशिश है कि इन सीटों पर फिर से कब्जा जमाए। मगर इस बार तीनों सीटों पर पिछली बार जैसा एकतरफा माहौल नहीं है।
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चुनावी बयार के बीच.... - फोटो : अमर उजाला


गुरुग्राम से पांच बार के सांसद केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत पर भाजपा ने तीसरी बार भरोसा जताया है। 2009 में उन्होंने इसी सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता था। फरीदाबाद सीट से भाजपा ने केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर को मैदान में उतारा है। वह राज्य में मंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पिछली बार उनके सामने 27 उम्मीदवार खड़े थे, जिनमें से 25 की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं, भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट पर भाजपा ने चौधरी धर्मबीर पर दांव खेला है। संसद में लिव इन को खतरनाक बीमारी बताने वाले चौधरी धर्मबीर के नाम पर अनोखा रिकॉर्ड है। वह बंसीलाल परिवार की तीन पीढ़ियों को चुनाव में हरा चुके हैं।


राव कर रहे भावनात्मक अपील, कांग्रेस पंजाबी कार्ड खेलने की तैयारी में

भाजपा उम्मीदवार राव इंद्रजीत यदि इस बार चुनाव जीतते हैं तो वह छठी बार संसद भवन पहुंचेंगे। क्षेत्र में लोकप्रिय होने के बावजूद वह जनसभाओं में मोदी के कार्य गिना रहे हैं। साथ ही लोगों से भावनात्मक अपील कर जिताने का अनुरोध कर रहे हैं। पिछले दिनों नूंह में आयोजित जनसभा में उन्होंने कहा कि वह 73 साल के हो चुके हैं। हो सकता है यह उनका आखिरी चुनाव हो। गुरुग्राम की नौ विधानसभा में से चार-चार सीट पर भाजपा व कांग्रेस का कब्जा है। एक पर निर्दलीय विधायक है। जजपा ने गायक राहुल यादव फाजिलपुरिया को मैदान में उतारा है। वे यादव वोट में सेंध लगा सकते हैं। 

  • वहीं, कांग्रेस मेव वोट (3 लाख से ज्यादा) के साथ पंजाबी कार्ड खेलने की तैयारी में है। गुरुग्राम लोकसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख पंजाबी मतदाता हैं। इसलिए कांग्रेस की ओर से राज बब्बर का नाम चल रहा है। गुरुग्राम में सबसे ज्यादा वोट करीब साढ़े तीन लाख यादवों के हैं। नूंह दंगों के बाद एकतरफा कार्रवाई से मेव में नाराजगी भी है। कांग्रेस इन्हीं के सहारे राव को टक्कर देने की तैयारी में है। हालांकि कांग्रेस से पूर्व वित्त मंत्री अजय सिंह यादव और विधायक राव दान सिंह का भी नाम चल रहा है। 
  • कांग्रेस के सामने मुश्किल यह है कि यदि अजय यादव को टिकट नहीं मिली तो पार्टी को उनकी नाराजगी झेलनी पड़ेगी। अजय यादव एक दिन पर राज बब्बर के नाम को लेकर असंतोष जाहिर कर चुके हैं। वहीं, यदि राज बब्बर को टिकट मिलती है तो इतने कम समय में क्षेत्र में पकड़ बना पाएंगे, इस पर भी संशय है। 

हैट्रिक के लिए जोर लगा रहे चौधरी धर्मबीर, कांग्रेस खड़ी करेगी मुश्किलें


भिवानी-महेंद्रगढ़ सीट पर चौधरी धर्मबीर हैट्रिक लगाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। वह एक-एक गांव में जा रहे हैं। हालांकि कुछ जगहों पर उन्हें विरोध भी झेलना पड़ा। विरोध तो पिछले चुनाव में भी हुआ था। कई गांवों में उन्हें घुसने नहीं दिया गया था, मगर अंत में उन्हें ही जीत मिली है। हालांकि इस बार वह भी मोदी की उपलब्धियां गिनाकर वोट मांग रहे हैं। इस सीट पर राव इंद्रजीत का भी अच्छा प्रभाव है। पिछले चुनाव में राव इंद्रजीत ने धर्मबीर के पक्ष में चुनाव प्रचार भी किया था। जाट और यादव वोटों की वजह से चौधरी धर्मबीर पिछले दो चुनावों में जीतते रहे हैं। दोनों ही बिरादरी इस क्षेत्र में जीत हार तय करती हैं। इसलिए कांग्रेस इस बार कांग्रेस विधायक राव दान सिंह को मैदान में उतारना चाहती है। 

  • हालांकि बंसीलाल परिवार की श्रुति चौधरी ने भी टिकट के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। मां किरण चौधरी के साथ वह कई बार दिल्ली के चक्कर लगा चुकी हैं। उनके समर्थन में रणदीप सुरजेवाला और कुमारी सैलजा भी हैं। लगातार दो चुनावों में हार में उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। वहीं, राव दान सिंह अहीरवाल वोट के आधार पर मजबूत उम्मीदवार हैं। लोग कहते हैं कि राव दान सिंह मैदान में आए तो मुकाबला दिलचस्प होगा। वहीं, श्रुति को टिकट नहीं मिला तो भितरघात भी झेलना पड़ सकता है। 
  • इस लोकसभा क्षेत्र की नौ विधानसभा में से पांच पर भाजपा का कब्जा है, दो पर कांग्रेस, एक पर जजपा और एक निर्दलीय के पास है। जजपा ने नांगल चौधरी के पूर्व विधायक राव बहादुर सिंह को उम्मीदवार घोषित किया है। 2014 के चुनाव में वह श्रुति चौधरी से आगे रहे थे।

गुर्जर के सामने रिकॉर्ड बचाने की चुनौती, कांग्रेस उलझन में


फरीदाबाद सीट से भाजपा उम्मीदवार कृष्ण पाल गुर्जर के सामने रिकॉर्ड बचाने की चुनौती है। वह पिछले दो चुनावों में रिकॉर्ड मतों से जीतते आए हैं। भले ही वह पिछला चुनाव छह लाख से अधिक वोटों से जीते हैं, मगर इस बार उनकी राह इतनी आसान नहीं है। कुछ जगहों पर उनके खिलाफ लोगों में नाराजगी है। साथ ही भितरघात का भी खतरा है। पूर्व कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल भी सक्रिय नहीं हैं। हालांकि पूर्व सीएम मनोहर लाल और सीएम नायब सिंह सैनी उनके लिए रैलियां कर चुके हैं। जाट व गुर्जर बाहुल्य क्षेत्र भाजपा का गढ़ रहा है। क्षेत्र की नौ लोकसभा सीटों में से सात पर भाजपा का कब्जा है। एक सीट कांग्रेस के पास है जबकि एक पर निर्दलीय विधायक का कब्जा है, जो भाजपा को समर्थन देते रहे हैं। 

  • वहीं, मूलचंद शर्मा और सीमा त्रिखा राज्य सरकार में मंत्री हैं। जजपा ने जाट बिरादरी से आने वाले युवा चेहरे नलिन हुड्डा पर दांव खेला है। कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। दरअसल कांग्रेस करण दलाल और महेंद्र प्रताप को लेकर ऊहापोह की स्थिति में है। करण जाट बिरादरी से हैं, जबकि महेंद्र प्रताप गुर्जर समुदाय से। हालांकि दोनों नेता सक्रिय हैं और दोनों ही हुड्डा के करीबी हैं। करण काफी दिनों से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अपनी सभाओं में वह स्थानीय मुद्दों को उठाते रहे हैं। उधर, कांग्रेस के प्रत्याशी घोषित न करने से भाजपा को फायदा मिलता दिख रहा है। भाजपा प्रचार में काफी आगे निकल चुकी है।
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