वर्ष 2019 में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने देश भर में भूजल स्तर गिरने वाले शहरों की सूची जारी की थी। उसमें भी चंडीगढ़ का नाम था। उस दौरान प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और उनके सलाहकार मनोज परिदा के नेतृत्व में निगम और प्रशासन के अधिकारियों की बैठक हुई थी। इसमें वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने पर जोर देने के साथ ही तालाबों को गोद लेने की बात कही गई थी। निगम और प्रशासन ने एक-एक तालाब गोद भी ले लिया, लेकिन महज कुछ दिनों के दिखावे के बाद सब ठप हो गया। हालत यह है कि आज इन तालाबों में पानी तक नहीं है।
आग बुझाने में ही बर्बाद कर दिया 11 लाख लीटर पीने का पानी
हाल ही में डंपिंग ग्राउंड में लगी भीषण आग को बुझाने में फायर ब्रिगेड ने 11 लाख लीटर पीने का पानी खर्च कर दिया। यह पानी सेक्टर 32 स्थित फायर स्टेशन में लगे ट्यूबवेल से लिया गया था। जब भी डंपिंग ग्राउंड में भीषण आग लगती है तो यहीं से पानी लिया जाता है। ऐसे में भूमि जल स्तर गिरना स्वाभाविक है।
यह सही है कि भूजल का उपयोग हम काफी मात्रा में कर रहे हैं, लेकिन हमने इसे रिचार्ज करने के लिए उतनी ही तेजी से अन्य विकल्प तलाशे हैं। ट्यूबवेलों को भी धीरे-धीरे कम करने का प्रयास है। -शैलेंद्र सिंह, चीफ इंजीनियर, नगर निगम