कैंसर ने 17 वर्षीय शाम लाल के सिर से पहले मां और फिर पिता का साया छीन लिया। बड़ा भाई दिमागी तौर से बीमार है और मामा के यहां रहता है। गांव के घर में शाम अकेला ही रहता है। तड़के जल्दी उठकर सुबह-दोपहर का खाना बनाकर वह स्कूल जाता है, वापस आकर पढ़ाई करता है और फिर रात की रोटी बना खाकर सो जाता है। कहता है, सूना घर काटने को दौड़ता है, रोने के लिए कोई कंधा तक नहीं। सरकार ने भी कोई सहायता नहीं दी।
20 साल की बेटी खोने वाला परिवार सदमे में
शाम के पड़ोस में रहने वाली 20 साल की बी-कॉम कर रही रोहिणी की ब्लड कैंसर से जूझने के बाद अमृतसर के गुरु रामदास अस्पताल में मौत हो गई थी। आंखों में आंसु लिए मां मधु बताती हैं, 4 महीने पहले बेटी चल बसी। पहले बुखार, टाइफाइड और फिर पता चला कि ब्लड कैंसर है। अमृतसर में इलाज करवाने के लिए जिंदगी भर की पूंजी लगा दी लेकिन बेटी को नहीं बचा पाए।
वहीं कई लोग अब भी बीमारी छिपा रहे हैं। कुछ लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लोग डर रहे हैं कि गांव की अधिक बदनामी होने पर जवान बच्चों की शादी में दिक्कत होगी। पहचान उजागर होने पर रिश्तेदार दूरी बना लेंगे। सामाजिक हीनभावना के डर से लोग खुलकर बीमारी नहीं बता पा रहे।
तीन दिन में दूसरी बार लोगों से मिलने भगवानसर गांव आया हूं, टीम अपने सर्वे और सैंपल का काम पूरा करे। उसके बाद रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी। लोग अगर ईंट भट्ठों को जिम्मेदार मानते हैं तो पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से बात कर चेक करवाया जाएगा, अगर भट्ठों में कमी पाई गई तो तुरंत बंद करवाए जाएंगे, लोगों के हित के लिए किसी भी कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी। -जोगिंद्रपाल, विधायक, हलका भोआ
हेल्थ विभाग, भू-परख विभाग और वाटर सप्लाई डिपार्टमेंट को सर्वे और सैंपल एकत्रित करने को कहा गया है। आठ गांवों भगवानसर, ठूठोवाल खड़खड़ा, खोजकी चक्क, बल्सुआ, गोतरा लाहड़ी, नरोट जैमल सिंह और बमियाल में उक्त विभाग सैंपल लेंगे और सर्वे करेंगे। उसके बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
-डॉ. अदिति सलारिया, सिविल सर्जन, पठानकोट