माैजूदा विधायक से नाराज थे लोग
अटेली सीट भाजपा दो बार से जीतती आई है। भाजपा ने इस बार मौजूदा विधायक सीताराम यादव का टिकट काट आरती राव को दिया है। सीताराम के पास पिछले पांच साल में न आम और न ही खास उपलब्धि है। उनके कार्यकाल को लेकर लोगों में खासी नाराजगी दिखती है। इस नाराजगी को देखते ही भाजपा ने आरती को उतारा है। आरती पर बाहरी उम्मीदवार का तमगा लगा है। तलवाड़ी के सेवानिवृत्त फौजी ओमप्रकाश कहते हैं कि पूरे पांच साल हो गए, मगर एक भी बार विधायक इलाके में नहीं आए। अनीता यादव चुनाव हारने के बावजूद लोगों से जुड़ी रही हैं। आरती तो कम ही दिखती हैं।
उनके पिता ही रैलियों में दिखते हैं। वहीं, अटेली के दयाराम कहते हैं कि तीनों के बीच मुकाबला कड़ा है। अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। मगर इलाके में राव इंद्रजीत के दबदबे से इन्कार नहीं किया जा सकता। उनके कहने पर अब भी वोट पड़ते हैं।
राव की साख का सवाल..योगी की करवानी पड़ी जनसभा
राव इंद्रजीत को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता राव बीरेंद्र सिंह पूर्व सीएम रह चुके हैं। भाजपा ने टिकट वितरण के दौरान उन्हें फ्री हैंड दिया और दक्षिण हरियाणा की अधिकतर सीटों पर उनके पसंदीदा लोगों को उम्मीदवार बनाया है। इनमें से एक उनकी बेटी भी शामिल हैं। लिहाजा उन्हें अपनी बेटी के साथ बाकी उम्मीदवारों को जिताने की भी जिम्मेदारी है। परिणाम यदि विपरीत आए तो उनकी साख पर असर होगा। इसीलिए उनकी कोशिश है कि उनकी बेटी ने सिर्फ जीत नहीं, बल्कि रिकॉर्ड जीत हासिल करें।
राव इंद्रजीत के पास चुनाव लड़ने और लड़वाने का काफी अनुभव है। लिहाजा उन्होंने आरती का चुनाव मैनेजमेंट संभाल रखा है। उनकी बेटी का चुनाव कितना फंसा हुआ, इसे इस बात से समझा जा सकता है राव इंद्रजीत को अटेली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा करवानी पड़ी है। इसके अलावा वह इलाके के लोगों को मैनेज करने में जुटे हैं। वह रूठों को भी मनाने में भी जुटे हैं।
पिछली बार दूसरे नंबर रहे अतरलाल भी मुकाबले में मुकाबले में तीसरे उम्मीदवार अतरलाल हैं। वह बसपा व इनेलो के साझा उम्मीदवार हैं। इलाके में उनकी पहचान नेताजी के नाम से है। उनकी रैलियों
और रोड शो अच्छी खासी भीड़ दिखती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सीताराम से वह करीब 18 हजार वोट से हारे थे और दूसरे नंबर पर रहे थे। उनके साथ प्लस प्वाइंट यह है कि तीनों उम्मीदवारों में सिर्फ वही स्थानीय हैं। लोगों के अनुसार, वे लोगों के सुख-दुख में पहुंचते हैं।
वह 15 साल से चुनाव लड़ रहे हैं, मगर जीत एक भी बार नसीब नहीं हुई है। दो लाख आबादी लाल वाले क्षेत्र में करीब आठ हजार राजपूत और करीब 30 हजार एससी वोटर हैं। अतरलाल राजपूत समुदाय से हैं और इसलिए वह इन वोटों को लामबंद करने में जुटे हैं। वह लोगों के बीच बेरोजगारी और शिक्षा के साथ आरती व अनीता को बाहरी उम्मीदवार बताकर लोगों को लुभाने में जुटे हैं। अटेली मंडी के अशोक कुमार कहते हैं कि अतरलाल मिलते वक्त कहते हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव है। इससे लोगों से उन्हें सहानुभूति भी मिल रही है।