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ग्राउंड जीरो: अटेली के मैदान में बेटी, दांव पर पिता राव इंद्रजीत की प्रतिष्ठा.. कांग्रेस-इनेलो से कड़ी टक्कर

Thu, 03 Oct 2024 10:37 AM IST
निवेदिता वर्मा आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

करीब एक दशक पहले मोदी लहर में राव इंद्रजीत कांग्रेस से भाजपा में शामिल हो गए थे। इस समय वह गुरुग्राम से सांसद हैं। अहीर बहुल दक्षिण हरियाणा की 11 विधानसभा क्षेत्रों में से अधिकतर सीटों पर उनका राजनीतिक प्रभाव माना जाता है। मगर इस बार उन्हें अपने ही गढ़ में ही कड़ी टक्कर मिल रही है। उनकी बेटी त्रिकोणीय मुकाबले में फंसी हैं। 
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अटेली विधानसभा ग्राउंड रिपोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दक्षिण हरियाणा की राजनीति का बड़ा नाम व केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत की प्रतिष्ठा इस चुनाव में दांव पर लगी है। उनकी राजनीतिक वारिस व बेटी आरती राव महेंद्रगढ़ जिले की अटेली विधानसभा सीट से भाजपा की उम्मीदवार हैं। यह उनका पहला चुनाव है। उनके पिता छह बार के सांसद हैं।

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कांग्रेस ने पूर्व विधायक व सीपीएस अनीता यादव पर दांव खेला है। पिछला विधानसभा चुनाव हारने के बावजूद वह इलाके में सक्रिय रही हैं। इससे लोगों के साथ उनका जुड़ाव है। वहीं, इनेलो-बसपा के साझा उम्मीदवार अतर सिंह ने भारी-भरकम समर्थकों की वजह से चुनाव को रोमांचक बना दिया है। उनके रोड शो व रैलियों में उतनी ही भीड़ जुट रही है, जितनी भाजपा व कांग्रेस के नेताओं की रैलियों में। 

माैजूदा विधायक से नाराज थे लोग

अटेली सीट भाजपा दो बार से जीतती आई है। भाजपा ने इस बार मौजूदा विधायक सीताराम यादव का टिकट काट आरती राव को दिया है। सीताराम के पास पिछले पांच साल में न आम और न ही खास उपलब्धि है। उनके कार्यकाल को लेकर लोगों में खासी नाराजगी दिखती है। इस नाराजगी को देखते ही भाजपा ने आरती को उतारा है। आरती पर बाहरी उम्मीदवार का तमगा लगा है। तलवाड़ी के सेवानिवृत्त फौजी ओमप्रकाश कहते हैं कि पूरे पांच साल हो गए, मगर एक भी बार विधायक इलाके में नहीं आए। अनीता यादव चुनाव हारने के बावजूद लोगों से जुड़ी रही हैं। आरती तो कम ही दिखती हैं।
उनके पिता ही रैलियों में दिखते हैं। वहीं, अटेली के दयाराम कहते हैं कि तीनों के बीच मुकाबला कड़ा है। अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। मगर इलाके में राव इंद्रजीत के दबदबे से इन्कार नहीं किया जा सकता। उनके कहने पर अब भी वोट पड़ते हैं।

राव की साख का सवाल..योगी की करवानी पड़ी जनसभा

राव इंद्रजीत को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता राव बीरेंद्र सिंह पूर्व सीएम रह चुके हैं। भाजपा ने टिकट वितरण के दौरान उन्हें फ्री हैंड दिया और दक्षिण हरियाणा की अधिकतर सीटों पर उनके पसंदीदा लोगों को उम्मीदवार बनाया है। इनमें से एक उनकी बेटी भी शामिल हैं। लिहाजा उन्हें अपनी बेटी के साथ बाकी उम्मीदवारों को जिताने की भी जिम्मेदारी है। परिणाम यदि विपरीत आए तो उनकी साख पर असर होगा। इसीलिए उनकी कोशिश है कि उनकी बेटी ने सिर्फ जीत नहीं, बल्कि रिकॉर्ड जीत हासिल करें। 

राव इंद्रजीत के पास चुनाव लड़ने और लड़वाने का काफी अनुभव है। लिहाजा उन्होंने आरती का चुनाव मैनेजमेंट संभाल रखा है। उनकी बेटी का चुनाव कितना फंसा हुआ, इसे इस बात से समझा जा सकता है राव इंद्रजीत को अटेली में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जनसभा करवानी पड़ी है। इसके अलावा वह इलाके के लोगों को मैनेज करने में जुटे हैं। वह रूठों को भी मनाने में भी जुटे हैं।

अनीता को सत्ता विरोधी लहर का फायदा

अटेली से कांग्रेस उम्मीदवार व पूर्व सीपीएस अनीता यादव 2009 में विधायक चुनी जा चुकी हैं। वह लोगों के बीच जाकर अटेली के ठप पड़े विकास कार्यों को मुद्दा बना रही हैं। अटेली मंडी के राजेश कुमार कहते हैं कि अनीता यादव भी अटेली की नहीं हैं, मगर लोगों में उनकी पकड़ है, क्योंकि उन्होंने लोगों का साथ नहीं छोड़ा। वह मिलनसार हैं, इसलिए लोग उनसे जुड़े हुए हैं। अनीता को चुनाव में सबसे बड़ा फायदा भाजपा की सत्ता विरोधी लहर का मिल रहा है। लोग बदलाव चाहते हैं। मगर चुनाव टक्कर का है और रोजाना समीकरण बदलते हैं। अगले दो दिन में क्या हो जाए, इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। अनीता के लिए राह आसान नहीं होने वाली है।

पिछली बार दूसरे नंबर रहे अतरलाल भी मुकाबले में मुकाबले में तीसरे उम्मीदवार अतरलाल हैं। वह बसपा व इनेलो के साझा उम्मीदवार हैं। इलाके में उनकी पहचान नेताजी के नाम से है। उनकी रैलियों
और रोड शो अच्छी खासी भीड़ दिखती है। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार सीताराम से वह करीब 18 हजार वोट से हारे थे और दूसरे नंबर पर रहे थे। उनके साथ प्लस प्वाइंट यह है कि तीनों उम्मीदवारों में सिर्फ वही स्थानीय हैं। लोगों के अनुसार, वे लोगों के सुख-दुख में पहुंचते हैं।

वह 15 साल से चुनाव लड़ रहे हैं, मगर जीत एक भी बार नसीब नहीं हुई है। दो लाख आबादी लाल वाले क्षेत्र में करीब आठ हजार राजपूत और करीब 30 हजार एससी वोटर हैं। अतरलाल राजपूत समुदाय से हैं और इसलिए वह इन वोटों को लामबंद करने में जुटे हैं। वह लोगों के बीच बेरोजगारी और शिक्षा के साथ आरती व अनीता को बाहरी उम्मीदवार बताकर लोगों को लुभाने में जुटे हैं। अटेली मंडी के अशोक कुमार कहते हैं कि अतरलाल मिलते वक्त कहते हैं कि यह उनका आखिरी चुनाव है। इससे लोगों से उन्हें सहानुभूति भी मिल रही है।
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भाजपा को भितरघात का भी खतरा

राव इंद्रजीत का कद जितना बड़ा है, उतने ही उनके राजनीतिक दुश्मन भी हैं। इस सीट से भाजपा नेता व अटेली की पूर्व विधायक और पूर्व डिप्टी स्पीकर संतोष यादव भी दावेदार थीं। जब आरती को टिकट मिला तो उन्होंने भी नामांकन कर दिया। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के समझाने के बाद वह मान गईं और नामांकन वापस ले लिया। मगर वह चुनाव प्रचार में नहीं दिख रही हैं। हालांकि स्थानीय भाजपा नेता गुटबाजी से इन्कार करते हैं। भाजपा नेता कहते हैं कि हर बार टिकट वितरण में यही होता है कि दावेदार तो कई होंगे, मगर टिकट तो सिर्फ एक को ही मिलेगा।
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