अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित अंबाला लोकसभा क्षेत्र में परंपरागत रूप से कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला रहा है। इस बार भी मुख्य मुकाबला भाजपा की बंतो कटारिया और कांग्रेस के वरुण चौधरी के बीच है।
इनेलो के गुरप्रीत सिंह, जजपा की डॉ. किरण चौधरी और बसपा के पवन मुकाबले में नजर नहीं आ रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, पंजाब और उत्तर प्रदेश की सीमाओं से जुड़े अंबाला लोकसभा क्षेत्र में हार-जीत का फैसला गैर जाट मतदाता करते हैं। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में किसान आंदोलन की तपिश बरकरार है तो पीएम मोदी के नाम का भी असर दिख रहा है। यहां करीब 20 प्रतिशत ऐसे मतदाता हैं जो अभी अपना रुख तय नहीं कर पाए हैं। यही मतदाता जिसके पक्ष में झुकेंगे जीत उसी की सुनिश्चित होगी।
चुनावी चर्चा में दोनों दलों को बराबर जगह
मुलाना के माता बाला सुंदरी मंदिर में प्रबंध समिति के कार्यालय में दोपहर के समय चुनावी चर्चा चल रही थी। इसमें भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के समर्थन में बोलने वाले थे। रमेश सैनी और अशोक राणा राम मंदिर, अनुच्छेद 370 के पक्ष में बोलने के साथ आयुष्मान योजना के लाभ गिना रहे थे। विशाल वाहिया और रमेश कश्यप बिना पर्ची-खर्ची के नौकरी लगने और मुफ्त अनाज योजना का समर्थन किया। वहीं, राजबीर राणा और धर्मबीर सैनी ने एमएसपी का मुद्दा उठाया।
कृषि कानूनों का विरोध करते हुए इन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी के मिलनसार व्यक्तित्व की प्रशंसा की। धीन गांव में कपड़े की दुकान करने वाले बलबीर ने भी वरुण चौधरी की प्रशंसा की, लेकिन पीएम मोदी के सामने उन्हें केंद्र विपक्ष का मजबूत नेता नहीं दिखाई देता।
अंबाला कैंट के निकलसन रोड पर मॉर्निंग वॉक के बाद भव्य गोयल, फतेह चंद, रमेश बंसल और कुलभूषण बतरा चाय के साथ चुनावी चर्चा कर रहे थे। पीएम मोदी की बेदाग छवि और राम मंदिर का असर इन सभी पर दिखा। जगाधरी बस अड्डे पर बस का इंतजार कर रहे विशाल और बलवंत के विचारों में राज्य सरकार के खिलाफ नाराजगी दिख रही थी।
छछरौली के बीज विक्रेता सुमित, रेडीमेड गारमेंट विक्रेता मनीष और जूस की दुकान चलाने वाले मनोज शर्मा ने बताया कि बीते चुनावों में वे भाजपा के पक्ष में मतदान करते रहे हैं, लेकिन एमएसपी कानून न बनने से इस बार ग्रामीण क्षेत्रों में भाजपा के प्रति नाराजगी है। उनका तर्क है कि अगर किसान की आय बढ़ेगी तो उसकी खरीद क्षमता बढ़ेगी और इसका फायदा ग्रामीण क्षेत्रों के कारोबारियों को होगा। हालांकि उन्होंने माना कि फसलों के दाम ज्यादा बढ़ने से उनसे तैयार उत्पादों के दाम बढ़ेंगे और इससे महंगाई बढ़ेगी।
अंबाला लोकसभा क्षेत्र का भाग्य इस बात पर तय होगा कि क्या कांग्रेस अपनी गुटबाजी को खत्म करके दलित मतदाता को एकजुट करने और क्षेत्र में विकास की कमी को अपने चुनावी एजेंडे के रूप में उठाने में कामयाब हो पाएगी। जबकि जीत की हैट्रिक लगाने के लिए बेकरार भाजपा को राष्ट्रवाद, राम मंदिर और मोदी के नाम के सहारे मतदाताओं को अपने पक्ष में करने की कोशिश करनी होगी।
सीएम सैनी और हुड्डा की साख दांव पर
बंतो की जीत से सीएम नायब सैनी की साख भी जुड़ी है। नारायणगढ़ विधानसभा क्षेत्र में उनका गांव मिर्जापुर आता है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्री कंवरपाल और राज्य मंत्री असीम गोयल के कंधों पर भी बड़ी जिम्मेदारी है। इस बार चुनाव में अंबाला छावनी से बाहर नहीं निकल रहे पूर्व गृह एवं स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज पर भी अपनी विधानसभा क्षेत्र में पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कराने की जिम्मेदारी है। वहीं, वरुण चौधरी को कांग्रेस की टिकट दिलाने के लिए पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पार्टी हाईकमान के सामने काफी पैरवी की थी। वरुण की हार-जीत पार्टी हाईकमान के सामने हुड्डा
का कद तय करेगी।
17 बार कांग्रेस और पांच भाजपा को मिली जीत
अंबाला लोकसभा सीट की जनता ने कांग्रेस और भाजपा सहित सभी प्रमुख दलों को मौका दिया है। 17 चुनावों में नौ में कांग्रेस ने जीत हासिल की तो पांच चुनाव भाजपा ने जीते हैं। बसपा, इनेलो और जनता पार्टी ने भी यहां से जीत दर्ज की है। 1952 में पहली बार अंबाला से कांग्रेस के टेकचंद ने जीत दर्ज की थी। इसके बाद के दो चुनाव 1957 और 1962 में भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की। 1977 और 1980 में यह सीट जनता पार्टी के खाते में गई। 1998 में बसपा ने इस सीट पर जीत हासिल की थी। बीते पांच चुनावों में से तीन बार भाजपा और दो बार कांग्रेस को जीत मिली है।
अधूरे रहे विकास के वादे
- यमुनानगर से वाया रादौर कुरुक्षेत्र तक रेललाइन नहीं बन सकी।
- बाढ़ से बचाव के लिए हथनीकुंड बैराज से गुमथला यमुना के किनारे पक्के नहीं हो सके।
- अंबाला साइंस उपकरणों के निर्माण का बड़ा केंद्र है। यहां हजारों छोटी बड़ी इकाइयां हैं, लेकिन आज तक अंबाला को साइंस सिटी का दर्जा नहीं मिल
पाया।
- यहां 100 करोड़ से साइंस उपकरणों के नवीनीकरण, शोध के मकसद से साल 2013 -14 में टूल रूम सेंटर बनाने को लेकर केन्द्रीय मंत्री ने
उद्घाटन भी किया, लेकिन निर्माण नहीं हुआ।
- अंबाला में यमुनानगर-चंडीगढ़ वाया नारायणगढ़ रेल लाइन बिछाने की मांग पुरानी है, लेकिन आश्वासन के बावजूद कुछ नहीं हुआ।
2019 के लोकसभा चुनाव में स्थिति
रतन लाल कटारिया भाजपा 56.72
कुमारी सैलजा कांग्रेस 30.71
2014 के लोकसभा चुनाव में स्थिति
रतन लाल कटारिया भाजपा 50.17
राजकुमार वाल्मीकि कांग्रेस 22.30
2009 के लोकसभा चुनाव में स्थिति
कुमारी सैलजा कांग्रेस 37.17
रतन लाल कटारिया भाजपा 35.49
अंबाला लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा वार दलीय स्थिति
विधानसभा क्षेत्र विधायक पार्टी
कालका प्रदीप चौधरी कांग्रेस
पंचकुला ज्ञानचंद गुप्ता भाजपा
नारायणगढ़ शैली चौधरी कांग्रेस
अंबाला छावनी अनिल विज भाजपा
अंबाला शहर असीम गोयल भाजपा
मुलाना (एससी) वरुण चौधरी कांग्रेस
साढौरा (एससी) रेणू बाला कांग्रेस
जगाधरी कंवरपाल गुज्जर भाजपा
यमुनानगर घनश्याम दास भाजपा
जातिगत समीकरण
अंबाला में दलित समुदाय रविदासिया और वाल्मीकि में विभाजित है। यहां से आज तक वाल्मीकि समाज किसी नेता ने जीत हासिल नहीं की है। 2014 में कांग्रेस ने वाल्मीकि समाज के राजकुमार वाल्मीकि को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन नतीजा उनके हक में नहीं रहा। रविदासिया समाज के रतन लाल कटारिया ने उन्हें 3.40 लाख वोटों के अंतर से हराया था। इस बार कांग्रेस ने हरिजन समाज से वरुण मुलाना को उतारा है।
सवर्ण 44.71%
जाट 6.6%
ब्राह्मण 8.67%
जट्ट सिख 5.8%
मुस्लिम 2.7%
पंजाबी 9.5%
वैश्य 5.88%
राजपूत 4.7%
ओबीसी 28.27%
सैनी 5%
गुज्जर 4%
मुस्लिम 2%
अनुसूचित जाति 27.2%
हरिजन 6.1%
रामदासिया 15.5%
वाल्मीकि 5.6%
मतदान प्रतिशत
2009 68.51
2014 72.03
2019 71.10