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विस चुनाव में CM बादल के लिए नाक का सवाल बनी लंबी, ग्राउंड रिपोर्ट

Mon, 30 Jan 2017 04:15 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, लंबी (मुक्तसर)
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सीएम बादल और सुखबीर - फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव में पंजाब की सबसे हॉट सीट लंबी में मुकाबला बेहद कांटे का है। शिरोमणि अकाली दल के लिए यहां की जीत प्रतिष्ठा का सवाल है। यह हलका सीएम प्रकाश सिंह बादल का है। आम आदमी पार्टी यहां बेहद आक्रामक चुनाव प्रचार कर रही है। वहीं, कैप्टन अमरिंदर सिंह की मौजूदगी से जंग दिलचस्प हो गई है। लंबी हलके ने कभी बादल को निराश नहीं किया।
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इस बार तीसरे खिलाड़ी की दमदार उपस्थिति से समीकरण बदले से नजर आते हैं। पहली बार लंबी में बयार का रुख भांपना जटिल है। ऐसा नहीं है कि किसी को बादल से नाराजगी है, या हलके में विकास नहीं हुआ। बल्कि, लोग बादल की तारीफ करते हैं, लेकिन बादल के सिपहसालार ही इस बार उनके लिए मुसीबत बन गए हैं। जहां पूछो, लोग सिर्फ चार नाम लेते हैं।

दयाल सिंह कोलियांवाली, तजिंदर सिंह मिड्डूखेड़ा, अवतार सिंह बनवाला और बलकरन सिंह बल्ला। पूरे हलके में इनके खिलाफ नाराजगी बादल के प्रति लोगों के प्यार पर भारी पड़ सकती है। गांव खिओवाली के बाहर खड़े तीन लोग कहते हैं कि इन चारों ने बादल तक किसी को पहुंचने ही नहीं दिया। किसी के काम नहीं कराए। इनमें से एक पंद्रह साल से कॉपरेटिव बैंक में सेवादार है। इलाके के विकास पर वह कहता है कि घर चलाने को पैसे नहीं हैं, मैंने सड़क क्या चाटनी है।
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बादल गांव वालों का कहना, सीएम तो बादल ही बनेंगे इस बार भी

विधानसभा चुनाव के लिए मुख्यमंत्री बादल ने भरा नामांकन
वहीं कुछ ही दूर स्थित सीएम के गांव बादल में तो लोग एक ही बात कहते हैं, सीएम तो बादल साब ही बनेंगे। सीएम के घर के ठीक सामने स्थित दुकान पर भी यही बात है कि बादल इस बार पहले से ज्यादा अंतर से जीतेंगे। इससे थोड़ा आगे गांव मान में अकाली दल और कांग्रेस के बीच मुकाबला नजर आता है। थोड़ा आगे बढ़ने पर लंबी में फिर लोगों का गुस्सा उबलता नजर आता है।

लंबी-मान की सड़क से होकर सीएम अक्सर गुजरते हैं, लोगों की नाराजगी है कि यहां पड़े बड़े-बड़े गड्ढे सीएम या अफसरों को नजर नहीं आते। इस गांव में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां बीस साल से वाटरसप्लाई पाइप नहीं पहुंची। लोग इन बातों के लिए बादल को जिम्मेदार नहीं ठहराते। फिर सारा दोष उनके सिपहसालारों पर ही मढ़ते हैं। सिर्फ सिपहसालारों को सबक सिखाने के लिए इस बार बदलाव का मूड है।

कई कट्टर अकाली भी इस बार शिअद को वोट डालने के मूड में नहीं हैं। लंबी और कुछ गांवों में अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान की बेहद प्रभावशाली रैलियों ने शिअद के खिलाफ गुस्से को अपने पक्ष में कर लिया था। आप का नारा, बादल नहीं बदलाव... लोगों के सिर चढ़ कर बोलने लगा था, लेकिन कैप्टन अमरिंदर के आने से हालात बिल्कुल बदल गए हैं। कांग्रेस की रैलियों में भी अच्छी भीड़ जुट रही है। आप को मिले समर्थन के साथ ही लोगों में एक झिझक भी है कि ये बाहरी हैं। बदलाव के हिमायती लोगों में से एक तबका कांग्रेस के साथ जाने के मूड में भी है।

लंबी हलके में बादल के खिलाफ कांग्रेस से लड़ने वाले महेश इंदर सिंह बादल का अपना वोट बैंक है। कैप्टन के लिए राहत की बात यह है कि महेश इंदर कांग्रेस के हक में चल रहे हैं। अकाली दल के सामने परंपरागत वोट बैंक बचाने की चुनौती है। किसान वर्ग कांग्रेस के साथ जाता है तो युवा आप के साथ खड़े नजर आ रहे हैं, लेकिन वोटिंग से पहले कोई भी अपने पत्ते खोलने को तैयार नहीं है।
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2012 में भी था यह फैक्टर

प्रकाश स‌िंह बादल
सीएम प्रकाश सिंह बादल के सिपहसालारों का फैक्टर पिछले विधानसभा चुनाव में भी था। लेकिन उस समय इतनी ज्यादा नाराजगी नहीं थी। तब यह बात उठने पर बादल ने लोगों से कहा था कि आगे से वह लोगों से सीधा राबता कायम करेंगे। लेकिन तमाम कारणों से ऐसा संभव नहीं हो सका। हालांकि बादल बार-बार अपनी सभाओं में यही कहते हैं कि उन्हें पता नहीं था।

पहली बार रात को सभाएं कर रहे हैं सीएम
लंबी की लड़ाई इस बार मुश्किल है, इसका एहसास सीएम प्रकाश सिंह बादल को भी है। बादल यहां से चार बार जीत चुके हैं, लेकिन पहले कभी उन्होंने रात को कैंपेन नहीं की। पहली बार बादल ने पिछले दिनों रात को सभाएं कीं। अब 31 जनवरी से दो फरवरी तक भी बादल लंबी में ही रहेंगे।

कैप्टन भी बोल रहे सिपहसालारों पर हमला
कैप्टन अमरिंदर सिंह को भी पता है कि इस बार बादल के सिपहसालारों के प्रति लोग बेहद गुस्से में हैं। इसलिए वह अपनी सभाओं में इसी बात को लेकर बादलों को टारगेट कर रहे हैं। रविवार को कैप्टन ने लंबी में आयोजित चुनावी सभाओं में एलान किया कि दयाल सिंह कोलियांवाली, सतिंदरजीत सिंह मंटा और तजिंदर सिंह मिड्ढूखेड़ा को जेल भेजेंगे। साथ ही कहा कि बादल आज कैसे कह सकते हैं कि उन्हें नहीं पता था कि इन ओएसडीज ने लोगों पर अत्याचार किए।
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