पंजाब में कर्ज में डूबे किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में राज्य सरकार पुनर्वास का इंतजाम कर रही है। ऐसे किसानों के परिजनों का पुनर्वास किया जाएगा।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा है कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए आंध्र प्रदेश की तर्ज पर योजना बनाई जा रही है। पंजाब सरकार ने हाईकोर्ट से इस संबंध में तीन माह का समय मांगा है।
इस मामले में मूवमेंट अगेंस्ट स्टेट रेप्रेशन संस्था ने हाईकोर्ट में पंजाब के कर्ज में डूबे किसानों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में जनहित याचिका दायर की थी।
पंजाब कृषि विभाग के सचिव केएस पन्नू ने हाईकोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा है कि कृषि और राजस्व विभाग इस बारे में परस्पर विचार विमर्श कर रहे हैं। इस संबंध में आंध्र प्रदेश सरकार को भी पत्र भी लिखा गया है।
आंध्र सरकार से हमने इस संबंध में बनाई गई योजना के बारे में जानकारी मांगी है। अभी तक जवाब नहीं आया है। जैसे ही आंध्र सरकार जवाब देगी, उसके तुरंत बाद हम अपनी योजना तैयार कर लेंगे।
पंजाब सरकार ने कोर्ट को यह भी बताया कि राज्य में कर्ज के बोझ के कारण आत्महत्या करने वाले किसानों के परिजनों को दो लाख रुपये की राशि जारी की जा रही है।
पिछले वर्ष पंजाब सरकार ने ऐसे परिवारों को दो किश्तों में यह राशि जारी की है। फिर भी राज्य सरकार इन परिवारों के पुनर्वास के लिए गंभीर है। चीफ जस्टिस संजय किशन कौल पर आधारित खंडपीठ ने पंजाब सरकार को इस विषय में नीति बनाए जाने के आदेश दिए थे ।