हरियाणा साहित्य अकादमी द्वारा पिछले वर्ष की भांति इस बार भी 36 पांडुलिपियों को प्रकाशन के लिए 10,000/- रुपये की राशि का अनुदान संस्तुत किया गया है।
इनमें हिसार के श्री राधे श्याम शुक्ल, की कविता कैसे बुने चदरिया साधो, चंडीगढ़ की मंजीत शर्मा मीरा की कहानी आत्म हत्या के क्षणों में, अंबाला शहर के संदीप कपूर बाल साहित्य सब रिश्तों से देश बड़ा, बहादुरगढ़ की मंजु दलाल के उपन्यास पनाह एवं कुरुक्षेत्र की कमलेश चौधरी के उपन्यास खोया हुआ गांव, अंबाला छावनी के डॉ. सुरेंद्र गुप्त की लघु कथा यहां सब चलता,
रोहतक के कृष्ण कुमार, नाटक/एकांकी सीढ़ियां स्वार्थ की, भिवानी के जेके वर्मा की जीवनी चौधरी रणबीर सिंह हुड्डा, अंबाला छावनी के जगत सिंह, की आलोचना संविधान सभा में हरियाणा, करनाल के बलबीर सिंह के गद्य एवं पद्य एन अनवीडिड गार्डन, कुरुक्षेत्र के हरिकृष्ण दिवेदी की कविता रागनी मसाल,
भिवानी के वीएम बेचैन, नाटक शकुंतला और दुष्यंत, करनाल के आचार्य महावीर प्रसाद शर्मा के नाटक एक रुपैप्या अर एक ईंट, हिसार के मदन गोपाल स्वामी लोक साहित्य हरियाणवी ग्राज्य जीवन और रीति रिवाज व नारनौल के शिवराज सिंह की लोक साहित्य हरियाणवी लोक काव्य एवं नाट्य के गौरव मास्टर नेकी राम के लिए दिया जाएगा।