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नई कार में जीपीएस नेविगेशन ने नहीं किया काम, कंपनी पर जुर्माना

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चंडीगढ़। नई कार में खराबी आने पर उसे ठीक नहीं करना और टाल-मटोल करते रहना होंडा कार कंपनी को महंगा पड़ गया। उपभोक्ता कमीशन ने एक मामले में कंपनी को सेवा में कोताही का दोषी पाया है और मुफ्त में जीपीएस नेविगेशन बदलने के आदेश दिये हैं। साथ ही उपभोक्ता को मुआवजे का एलान भी किया है।
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सेक्टर-7ए में रहने वाले हिम्मत सिंह ने होंडा कार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, अल्पाइन मोबाइल मीडिया सॉल्यूशन, मैप माय इंडिया और अंबाला कैंट स्थित किशिव मोटर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ उपभोक्ता कमीशन में शिकायत दी। अपनी शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 3 फरवरी 2016 को किशिव मोटर प्राइवेट लिमिटेड से होंडा सिटी कार के टॉप मॉडल को खरीदा। कार में जीपीएस नेविगेशन म्यूजिक सिस्टम के साथ मौजूद था। कार खरीदने के बाद वह अंबाला से चंडीगढ़ आ रहे थे। इस दौरान रास्ते में ही जीपीएस नेविगेशन ने काम करना बंद कर दिया। उन्होंने इसकी जानकारी किशिव मोटर प्राइवेट लिमिटेड को दी। इसके बाद कार को सर्विस के लिए ले जाया गया और भरोसा दिलाया गया कि इस समस्या को ठीक कर दिया गया है, लेकिन इसके बाद भी उपभोक्ताओं को इस तरह की समस्या बार-बार आती रही। जीपीएस नेविगेशन को ठीक कराने के लिए अल्पाइन मोबाइल मीडिया सॉल्यूशन ले जाया गया लेकिन तब भी जीपीएस ने ठीक से काम करना शुरू नहीं किया। काफी दिनों बाद उन्हें बताया गया कि कार की मैन्युफैक्चरिंग तरफ से ही जीपीएस नेविगेशन में समस्या है। इसको लेकर उपभोक्ता ने सेवा में कोताही का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की।
मुफ्त में जीपीएस नेविगेशन को बदला जाए: कमीशन
उपभोक्ता कमीशन ने सभी को नोटिस जारी किया। अल्पाइन मोबाइल मीडिया सॉल्यूशन ने कमीशन के नोटिस का जवाब नहीं दिया जबकि होंडा कार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, मैप माय इंडिया और किशिव मोटर प्राइवेट लिमिटेड ने जवाब दाखिल कर कहा कि उन्होंने सेवा में कोताही नहीं बरती है और उनके ऊपर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। हालांकि उपभोक्ता कमीशन ने सभी पक्षों की सुनवाई के बाद होंडा कार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और किशिव मोटर प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कोताही का दोषी पाया और मुफ्त में कार का जीपीएस नेविगेशन बदलने का आदेश दिया। इसके अलावा मानसिक प्रताड़ना और शारीरिक पीड़ा झेलने के लिए 15 हजार रुपये मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में 7 हजार रुपये देने के आदेश दिए। कमीशन ने स्पष्ट किया कि इस आदेश की पालना 30 दिन के अंदर की जानी चाहिए, अन्यथा कंपनियों को 10 हजार रुपये अतिरिक्त चुकाने होंगे।
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