शहर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की आजकल खूब दौड़ लग रही है। विभाग ने एक साथ शिक्षकों को कई कामों की जिम्मेदारी सौंप दी है। एक तरफ सरकारी स्कूलों में वार्षिक परीक्षाओं का दौर जारी है।
अभिभावकों को साथ ही उत्तर पुस्तिकाएं चेक करने के अलावा रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेदारी भी दी गई है। अब विभाग के नए आदेश ने सैकड़ों शिक्षकों को पसीना ला दिया है।
दो दिन पहले ही विभाग की ओर से सभी सरकारी स्कूलों के गेस्ट, एसएसए, कांट्रेक्ट और रेगुलर शिक्षकों को नए सत्र (अप्रैल 2014) से पहले शहर और साथ लगते गांव और कालोनियों में सर्वे की जिम्मेदारी दी है। इतना ही नहीं सर्वे का काम सिर्फ तीन दिन के भीतर करना होगा।
जानकारी के अनुसार स्कूलों को जारी चिट्ठी में चाइल्ड मैपिंग के तहत उस स्कूल के सेक्टर या कालोनी में 0 से 18 साल तक आयु वर्ग का पूरा सर्वे करने को कहा गया है। इस सर्वे के आधार पर विभाग की ओर से बच्चों का स्कूलों में रजिस्ट्रेशन होगा।
कैसे करें सभी काम
एक सरकारी स्कूल में कार्यरत शिक्षक ने कहा कि पहली से 9वीं क्लास की परीक्षाएं चल रही हैं। शिक्षकों को पहले परीक्षा में ड्यूटी देनी पड़ती है, उसके बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडल चेक करने के लिए दे दिए जाते हैं। रिजल्ट भी तैयार करना पड़ता है।
सर्वे में ड्यूटी लगने पर शिक्षकों को पेपर से पहले या बाद में घरों के चक्कर लगाने पड़ेंगे। एक शिक्षक को कम से कम 100 घरों में जाकर सर्वे करना होता है। घर लॉक होने पर फिर से जाना पड़ता है। सर्वे के लिए आवश्यक सर्वे सीट भी पूरी नहीं मिली है। प्रिंटिंग नहीं होने के कारण शिक्षकों को 1-2 शीटें ही मिली हैं।
एसएसए कांट्रेक्ट रिन्यू लेटर जारी, कंप्यूटर टीचर्स को इंतजार
शहर के सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान(एसएसए) के तहत कार्यरत 1200 से अधिक शिक्षकों के कांट्रेक्ट को रिन्यू करने का लेटर सभी स्कूलों को मिल चुका है। 31 मार्च से पहले एसएसए शिक्षकों को रिन्यू लेटर पूरी तरह भरकर शिक्षा विभाग के पास जमा कराना होगा।
गौरतलब है कि विभाग हर साल एसएसए शिक्षकों का कांट्रेक्ट रिन्यू करता है। दूसरी तरफ दो महीने से विरोध प्रदर्शन कर रहे सरकारी स्कूलों में कार्यरत 200 से अधिक कांट्रेक्ट कंप्यूटर टीचर्स को रेगुलर करना तो दूर उनके कांट्रेक्ट रिन्यू करने या वेतन बढ़ाने पर शिक्षा विभाग कोई जवाब नहीं दे रहा।
चुनावी ड्यूटी के लिए शिक्षक रहें तैयार
शहर के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को अभी अगले महीने तक आराम मिलने की उम्मीद नहीं है। मार्च में रिजल्ट घोषित होने के बाद 10 अप्रैल को चंडीगढ़ लोकसभा चुनाव में भी शिक्षकों की ड्यूटी लगना तय माना जा रहा है। शिक्षकों ने अभी से ड्यूटी से नाम हटाने के लिए आला अधिकारियों से संपर्क करना शुरू कर दिया है।