हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन कर रहे लोगों को रासुका का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जाट जो भी करें, काफी सोच समझकर। दरअसल, सरकार ने आंदोलन के दौरान शांति भंग करने पर आंदोलनकारियों पर रासुका लगाने के आदेश दिए हैं। सरकार ने आंदोलन के तीसरे दिन शांति भंग किए जाने के प्रयासों की रिपोर्ट मिलने पर आंदोलन प्रभावित जिलों के डीसी को रासुका लगाने की शक्तियां सौंप दी हैं।
स्थिति के मद्देनजर शांति बनाए रखने के लिए डीसी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करने के लिए अब अधिकृत हो गए हैं। कानून के तहत डीसी को बिना केस दर्ज किए उपद्रव फैलाने वालों को 90 दिन तक नजरबंद रखने का अधिकार है। आंदोलन के दौरान स्थिति सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार ने ये अहम कदम उठाया है।
सरकार ने डीसी को साफ निर्देश दिए हैं कि स्थिति बिगड़ने की आशंका पर वे तत्काल रासुका लगा सकते हैं। इसके साथ ही सरकार ने आंदोलन के चलते नौ जिलों के 381 अधिकारियों को स्पेशल ड्यूटी मजिस्ट्रेट के अधिकार दिए हैं। इन अधिकारियों को उपद्रवियों पर कार्रवाई के लिए विशेष निर्देश की आवश्यकता नहीं होगी।
बीते साल नहीं दी गई थी ये शक्तियां
प्रदेश के 19 जिलों में चल रहे धरनास्थलों पर दूसरे दिन शांति
- फोटो : अमर उजाला
बीते वर्ष फरवरी में हुए आंदोलन में ड्यूटी मजिस्ट्रेट के पास इस तरह की शक्तियां नहीं थीं। सबसे अधिक विशेष ड्यूटी मजिस्ट्रेट रोहतक जिले में 107 और सोनीपत में 77 नियुक्त किए गए हैं।
मुख्य सचिव कार्यालय से जारी नई हिदायतों के अनुसार मंडलायुक्तऔर डीसी अब शाम साढ़े तीन बजे तक के हालात की रिपोर्ट मुख्यालय को भेजेंगे। अभी तक दोपहर दो बजे तक रिपोर्ट ली जा रही थी। मुख्य सचिव डीएस ढेसी और गृह सचिव रामनिवास ने मंगलवार को आंदोलन की समीक्षा की।
डीजीपी केपी सिंह और एडीजीपी कानून-व्यवस्था मोहम्मद अकील से फीडबैक लेकर पूरी रिपोर्ट से मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया। सीएम कार्यालय ने भी सभी डीसी-एसपी को उपद्रव होने पर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है।
ये है रासुका
jat andolan
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम 1980 देश की सुरक्षा के लिए सरकार को अधिक शक्ति देने से जुड़ा कानून है। अगर सरकार को लगे कि कोई व्यक्ति सुरक्षा और शांति के लिए खतरा है तो उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। कानून के तहत व्यक्तिको पहले तीन माह के लिए गिरफ्तार करने का प्रावधान है।
फिर आवश्यकतानुसार तीन-तीन माह के लिए गिरफ्तारी की अवधि बढ़ाई जा सकती है। एक बार में तीन महीने से अधिक की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अगर किसी अधिकारी ने गिरफ्तारी की है तो उसे इसका आधार सरकार को बताना जरूरी है।
जब तक सरकार इस गिरफ्तारी का अनुमोदन नहीं कर दे, तब तक यह गिरफ्तारी 12 दिन से ज्यादा समय तक नहीं होती। अगर अधिकारी पांच से दस दिन में जवाब दाखिल करता है तो अवधि को 12 की जगह 15 दिन किया जा सकता है। रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद सात दिन के अंदर इसे केंद्र सरकार को भेजना अनिवार्य है।