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हरियाणा में सरकार अपनी मर्जी से नहीं कर सकेगी घोषणाएं, लेनी पड़ेगी आयोग से अनुमति

Fri, 23 Nov 2018 12:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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निर्वाचन आयोग
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हरियाणा के पांच नगर निगमों और दो नगरपालिकाओं के चुनाव के चलते अब सरकार कोई भी राज्यस्तरीय घोषणा अपनी मर्जी से नहीं कर सकेगी। आदर्श आचार संहिता चुनावी निकायों के क्षेत्र में ही लागू हुई है, लेकिन कोई भी घोषणा करने से पहले सरकार को चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी। आयोग उन्हीं घोषणाओं को मंजूरी देगा, जिनसे किसी भी सूरत में चुनाव प्रभावित न हो। 

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चुनाव आयुक्त डॉ. दलीप सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आचार संहिता वाले क्षेत्रों में अब कोई भी तबादला या नई नियुक्ति नहीं होगी। ऐसा कदम उठाने से पहले आयोग से अनुमति लेना अनिवार्य है। पूरा चुनाव तीन तरह के पर्यवेक्षकों की निगरानी में संपन्न होगा। आयोग की तरफ से पुलिस, व्यय व सामान्य पर्यवेक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं। 

चुनाव के दौरान सोशल मीडिया पर भी नजर रखी जाएगी। अगर किसी व्यक्ति ने फेक न्यूज या सद्भाव को बिगाड़ने वाली कोई खबर डाली तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। किसी भी सोशल मीडिया पर फेक न्यूज या सामाजिक, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली अथवा भाईचारा बिगाड़ने एवं कानून व्यवस्था को खराब करने से संबंधित किसी भी खबर को पोस्ट न ही करें तो बेहतर होगा। सोशल मीडिया का उपयोग करने वाले यूजर्स केवल पुष्ट व कानून सम्मत जानकारी ही साझा करें। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस व प्रशासन से पूरा सहयोग लिया जाएगा। संवेदनशील और अति संवेदनशील बूथ भी डीसी व एसपी ही मिलकर तय करेंगे।

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खर्च का ब्योरा न देने वालों पर कड़ा एक्शन

नगर निकाय संस्थाओं का चुनाव लड़कर अपने खर्च का समय पर ब्योरा जमा न करवाने वाले उम्मीदवारों के लिए राज्य चुनाव आयोग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पिछले चुनाव के दौरान खर्च का विवरण निर्धारित अवधि में न दिए जाने के कारण आयोग ने हिसार, रोहतक, यमुनानगर, पानीपत एवं करनाल नगर निगम से संबंधित 531 उम्मीदवारों को इस बार का चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया है। 

अगर कोई उम्मीदवार चुनाव परिणाम के एक महीने के अंदर-अंदर अपने चुनावी खर्च का विवरण अपने जिले के डीसी या राज्य चुनाव आयोग से नामित अधिकारी के समक्ष जमा नहीं करवाता है तो वह अगले पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा, यह अवधि पहले तीन साल की थी। वर्ष 2013 में नगर निकाय का चुनाव जिन उम्मीदवारों ने लड़ा था, उनमें से हिसार के 113, करनाल के 128, पानीपत के 95, रोहतक के 100 व यमुनानगर के 95 उम्मीदवारों ने अपने चुनावी खर्च का विवरण परिणाम के बाद उपायुक्त को नहीं दिया था। इस कारण इन सभी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया है। इनमें अधिकांश चुनाव हारने वाले उम्मीदवार ही हैं।

पार्षद उम्मीदवार खर्च कर सकेंगे पांच लाख, पालिका सदस्य दो लाख
नगरपालिका के सदस्य चुनाव लड़ने पर दो लाख, नगर निगम के सदस्य 5 लाख रुपये खर्च कर पाएंगे। मेयर के चुनाव खर्च की सीमा 20 लाख रुपए निर्धारित की गई है। खर्च का गलत ब्योरा देना भी भारी पड़ सकता है। चूंकि, खर्च का आंकलन व्यय पर्यवेक्षक अपने स्तर पर भी करेंगे।
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