नगर निकाय संस्थाओं का चुनाव लड़कर अपने खर्च का समय पर ब्योरा जमा न करवाने वाले उम्मीदवारों के लिए राज्य चुनाव आयोग ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। पिछले चुनाव के दौरान खर्च का विवरण निर्धारित अवधि में न दिए जाने के कारण आयोग ने हिसार, रोहतक, यमुनानगर, पानीपत एवं करनाल नगर निगम से संबंधित 531 उम्मीदवारों को इस बार का चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया है।
अगर कोई उम्मीदवार चुनाव परिणाम के एक महीने के अंदर-अंदर अपने चुनावी खर्च का विवरण अपने जिले के डीसी या राज्य चुनाव आयोग से नामित अधिकारी के समक्ष जमा नहीं करवाता है तो वह अगले पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य होगा, यह अवधि पहले तीन साल की थी। वर्ष 2013 में नगर निकाय का चुनाव जिन उम्मीदवारों ने लड़ा था, उनमें से हिसार के 113, करनाल के 128, पानीपत के 95, रोहतक के 100 व यमुनानगर के 95 उम्मीदवारों ने अपने चुनावी खर्च का विवरण परिणाम के बाद उपायुक्त को नहीं दिया था। इस कारण इन सभी उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के अयोग्य घोषित किया है। इनमें अधिकांश चुनाव हारने वाले उम्मीदवार ही हैं।
पार्षद उम्मीदवार खर्च कर सकेंगे पांच लाख, पालिका सदस्य दो लाख
नगरपालिका के सदस्य चुनाव लड़ने पर दो लाख, नगर निगम के सदस्य 5 लाख रुपये खर्च कर पाएंगे। मेयर के चुनाव खर्च की सीमा 20 लाख रुपए निर्धारित की गई है। खर्च का गलत ब्योरा देना भी भारी पड़ सकता है। चूंकि, खर्च का आंकलन व्यय पर्यवेक्षक अपने स्तर पर भी करेंगे।