हरियाणा सरकार ने पराली जलाने वाले किसानों पर कानूनी शिकंजा कसने का मन बना लिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, कृषि विभाग और पुलिस की हिदायतों के बावजूद खेत में गेहूं की पराली जलाने वाले किसानों पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का केस दर्ज किया जाएगा। सरकार कोई रियायत बरतने के मूड में नहीं है, चूंकि धान के सीजन में एनसीआर क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी खट्टर सरकार को खूब खरी-खोटी सुना चुके हैं। इसलिए गेहूं की कटाई के बाद पराली जलाने के मामले सामने आने पर सरकार ने कार्रवाई को लेकर कमर कस ली है।
दिल्ली और हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। पहले तो किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए शिक्षित किया जाएगा, इसके बाद अगर नहीं माने तो फिर कानूनी कार्रवाई होगी। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मोहम्मद अकील ने बताया कि हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र में इस मौसम में प्रदूषण बढ़ जाता है।
इसे देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, सर्वोच्च न्यायालय और सरकार ने संज्ञान लिया है। इसमें पाया गया कि प्रदूषण किसानों के पराली जलाने से बढ़ता है। पुलिस ने किसानों को निर्देश दिए हैं कि वे पराली न जलाएं। किसानों से बातचीत भी की जा रही है। उपायुक्तों को जिलों में धारा-144 लागू करने के लिए कहा गया है। यदि कोई किसान इन नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।