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जाट आरक्षण आंदोलन: सामूहिक हिंसा व मुरथल गैंगरेप को लेकर जवाब के लिए सरकार ने मांगी मोहलत

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-हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर उठाए थे सवाल, एसआईटी कैसे करेगी दो हजार केस की जांच
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान सामूहिक हिंसा व मुरथल में गैंगरेप को लेकर हाईकोर्ट द्वारा लिए गए संज्ञान मामले में हरियाणा सरकार ने पक्ष रखने के लिए मोहलत मांगी है। हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई 18 नवंबर तक स्थगित कर दी है। हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई पर एसआईटी को जांच की स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया था।
हरियाणा में जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के घर पर तोड़-फोड़ व वाहनों को जलाने के आरोपी दिलावर सिंह ने हाईकोर्ट में जमानत की याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट को बताया गया था कि सुप्रीम कोर्ट इन मामलों का ट्रायल दिसंबर 2018 तक पूरा किए जाने का आदेश दे चुका है। फरवरी 2019 में हुई सुनवाई पर हाईकोर्ट ने जांच पर सवाल उठाते हुए जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और आगजनी मामले में दिसंबर 2018 तक इन केस का ट्रायल पूरा करने के आदेश दिए थे लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इन आदेशों के बावजूद भी इनका ट्रायल पूरा नहीं हो पाया है। जाट आरक्षण आंदोलन के चलते मुरथल में सामूहिक दुष्कर्म व राज्य में हिंसा मामले में हाईकोर्ट 24 फरवरी 2016 को संज्ञान लेकर इस मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए थे।
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कोर्ट मित्र अनुपम गुप्ता ने हाई कोर्ट को बताया था कि इस मामले को लेकर कुल 2105 मामले दर्ज हैं, जिनमें से सरकार लगभग पांचवां हिस्सा 407 केस वापस लेना चाहती है। सभी पक्षों को सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने सवाल उठाया था कि एक एसआईटी 2000 के करीब मामले में कैसे जांच कर सकती है।
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