याचिकाकर्ता ने खासतौर पर फतेहवीर के बचाव कार्य के दौरान बड़ी संख्या में शामिल डेरा समर्थकों पर भी सवाल उठाए थे। याची ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2010 और फिर बाद में वर्ष 2013 में बोरवेल को लेकर सभी राज्यों को दिशा-निर्देश दिए थे जिनका पालन न होने के कारण ही मासूम फतेहवीर की जान गई है। हाईकोर्ट ने इस पर पंजाब के मुख्य सचिव से जवाब मांगा था।
मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा दाखिल करते हुए बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए विभिन्न विभागों को कई बार लिखा गया। साथ ही अब किसी मासूम की जान न जाए इसके लिए सभी डीसी ने अपने क्षेत्रों में ऐसे खुले बोरवेल का सर्वे किया और पूरे पंजाब में मौजूद ऐसे 1418 बोरवेल बंद कराए हैं।
साथ ही अब कोई भी नया बोरवेल खोदने से पहले सरकारी मंजूरी को अनिवार्य कर दिया गया है। इसके चलते अब कोई बोरवेल खुदने के बाद खुला रहकर किसी मासूम की मौत का कारण नहीं बनेगा। हाईकोर्ट ने इस हलफनामे पर अब याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने की छूट देते हुए सुनवाई तीन सप्ताह के लिए टाल दी है।