चंडीगढ़। चैत्र वासंतिक नवरात्र इस बार नाै नहीं, आठ दिन के होंगे। तृतीया तिथि का क्षय रहेगा। ऐसे में दूज और तीज इकट्ठी होंगी। यह जानकारी सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी बीरेंद्र नारायण मिश्र ने दी। उन्होंने कहा कि नवरात्र का घटना अशुभ माना जाता है, लेकिन नवरात्र में मां भगवती हाथी पर सवार होकर आ रही हैं। हाथी पर ही सवार होकर विदा भी हो रही हैं। समुखी प्रतिपदा होने से यह दोष समाप्त हो जाता है। नवरात्र की शुरुआत 30 मार्च से होगी। मां के हाथी पर सवार होकर आने पर धन, धान्य में वृदि्ध होती है। ऐसे में श्रद्धालुओं को मनवांछित फल प्राप्त होता है।
सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग
श्री देवालय पूजक परिषद के पूर्व अध्यक्ष और सेक्टर-28 के खेड़ा शिव मंदिर के प्रमुख पुजारी आचार्य ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्रि 30 मार्च दिन रविवार से प्रारंभ हो रही है। इस दिन चंद्रमा रेवती नक्षत्र व मीन राशि में रहेंगे। सर्वार्थ सिद्धि योग का भी संयोग बनेगा। 29 मार्च को दोपहर बाद 4:28 बजे प्रतिपदा प्रारंभ होगी और 30 मार्च को दोपहर 12:50 बजे तक रहेगी। नवरात्रि 30 मार्च से प्रारंभ होंगी। उन्होंने कहा कि नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है।
कलश स्थापना के मुहूर्त
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि सुबह 6 बजकर 18 मिनट से सुबह नौ बजे तक बहुत अच्छा मुहूर्त है। इसके बाद अभिजीत मुहूर्त में घट स्थापना करना चाहिए।