पंजाब यूनिवर्सिटी के चार हजार शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने वेतन के लिए पीयू को 38 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। यह रकम दो माह के वेतन के लिए दी है। हालांकि रकम कम है लेकिन पीयू अपने दूसरे प्रोजेक्ट से रकम उधार लेकर जून व जुलाई का वेतन दे देगा। अगस्त माह की सैलरी के लिए पीयू ने प्रस्ताव अभी से भेज दिया है ताकि आगे दिक्कतें न आएं।
पंजाब यूनिवर्सिटी को केंद्र सरकार से हर साल लगभग 250 करोड़ रुपये शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन के लिए मिलता है। पीयू लगभग चार हजार लोगों को वेतन देता है। यह स्थाई हैं। बाकी कांट्रेक्ट कर्मी व शिक्षक अलग हैं। गेस्ट फैकल्टी आदि को पीयू अन्य स्रोत से पगार देता है। लॉकडाउन के कारण पीयू की ग्रांट दो माह से रुकी हुई थी। उसका कारण था कि केंद्र सरकार का खजाना खाली था।
धीरे धीरे लॉकडाउन खुला तो केंद्र के खजाने में टैक्स के पैसे आना शुरू हुए और उसी से पीयू को राहत मिलती नजर आई। ग्रांट न आने के कारण पीयू के शिक्षकों व कर्मचारियों में असमंजस का माहौल था। पीयू का खजाना भी खाली हो चुका था। कुछ प्रोजेक्ट या योजनाओं की रकम खाते में जरूर थी, लेकिन उसका शत-प्रतिशत प्रयोग नहीं किया जा रहा था। एडमिशन हुए नहीं, इसके कारण फीस आदि नहीं आई।
पीयू की ओर से केंद्र सरकार को पत्र लिखे गए ताकि ग्रांट जारी हो सके। अब जाकर पीयू को कुछ सफलता हाथ लगी है। 38 करोड़ रुपये पीयू के खजाने में आ गए हैं। केंद्र सरकार चार किश्तों में पैसे पीयू को देती है। हर तीन माह का वेतन एक बार में आता है, लेकिन धन अभाव के कारण इस बार दो ही माह के वेतन की रकम मिली है।
26 करोड़ की व्यवस्था में जुटा पीयू
पंजाब यूनिवर्सिटी का एक माह का वेतन खर्च 25 करोड़ रुपये है। इसके अलावा लगभग सात करोड़ रुपये पेंशन आदि पर खर्च होता है। इस तरह एक माह में पीयू को 32 करोड़ रुपये चाहिए। दो माह के वेतन के लिए 64 करोड़ रुपये की आवश्यकता है जबकि पीयू को 38 करोड़ रुपये मिले हैं। 26 करोड़ रुपये कम पड़ रहे हैं। इसकी व्यवस्था में पीयू जुटा हुआ है। यह रकम अन्य प्रोजेक्ट आदि से ली जाएगी।
केंद्र सरकार से दो माह के वेतन की ग्रांट 38 करोड़ रुपये मिली है। अगस्त माह के वेतन के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया गया है। कुछ रकम कम पड़ेगी तो उसकी व्यवस्था अन्य मदों से की जाएगी।
- विक्रम नैयर, एफडीओ पीयू