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खुशखबरी: पीजीआई में सैंपल देने के लिए लाइनों का झंझट खत्म

Wed, 30 Nov 2016 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पीजीआई चंडीगढ़ - फोटो : demo pics
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पीजीआई की न्यू ओपीडी में मरीजों को जांच के लिए सैंपल देने के लिए लगने वाली लंबी लाइनों का झंझट खत्म हो गया है। मंगलवार से बायोकेमेस्ट्री लैब में टोकन सिस्टम शुरू कर दिया है। अब मरीजों को कुर्सी पर बैठकर अपनी बारी का इंतजार करना होगा। स्क्रीन पर नंबर डिस्प्ले होते ही काउंटर पर जाना है और सैंपल देकर वापस लौट जाना है। इससे मरीजों को काफी बड़ी राहत है।
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टोकन सिस्टम शुरू होने से पहले लैब की हालात काफी भयावह थे। सैंपल देने का मतलब पहाड़ को खोदकर नदी निकालने के बराबर था। गर्मी में तो हालात और बिगड़ जाते थे। कई बार तो मरीज चक्कर खाकर गिर भी पड़ते थे। तीन साल से ज्यादा समय से टोकन सिस्टम पर काम किया जा रहा था।

ऐसे काम करेगा टोकन सिस्टम
टेस्ट की फीस जमा कराने के बाद मरीज को सबसे पहले न्यू ओपीडी के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित कमरा नंबर 25 में जाना होगा। वहां से टोकन लेकर कमरे में बैठना होगा। कमरे में ही डिस्प्ले स्क्रीन लगी हैं। इस पर टोकन नंबर डिस्प्ले होगा कि किस काउंटर पर जाना है। सैंपल देने के लिए तीन काउंटर बनाए गए। तीनों में से किसी एक पर मरीज का टोकन नंबर डिस्प्ले होगा। इसके बाद उस काउंटर पर सैंपल देना होगा। जब तक नंबर डिस्प्ले न हो, तब तक कमरा नंबर 25 में ही बैठना होगा।
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पहले घंटों तक लगना पड़ता था लाइन में

चंडीगढ़ का पीजीआई अस्पताल - फोटो : PTI
पहले घंटों तक लगना पड़ता था लाइन में
टोकन सिस्टम से पहले लैब में सैंपल देने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ता था। न तो कोई सिस्टम था और न ही मैनेजमेंट। इससे मरीज भी परेशान होते थे और लैब अटेंडेंट भी। एक सैंपल देने में कम से कम तीन घंटे का समय लगता था। पहले वायल लेने के लिए लाइन में लगना पड़ता और फिर सैंपल देने के लिए।

एक मरीज को दो बार लाइन में लगना पड़ता था। इससे उसकी हालत खराब हो जाती थी। एक ही कमरे में वायल और सैंपल देने की लाइन लगानी पड़ती थी। इससे भीड़ भी बढ़ती थी और परेशानियां भी।

लैब के अलावा ओपीडी के कुछ डिपार्टमेंट में भी टोकन सिस्टम ट्रायल के तौर पर शुरू किया गया है। इससे फायदा मिल रहा है। मरीजों का समय भी बचेगा। 
- मंजू वडवालकर, पीआरओ पीजीआई
 
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