लोकसभा चुनाव खत्म होते ही लोगों को बिजली दरें बढ़ने की आशंका से राहत दे दी गई है। बिजली विभाग ने 21 फसीदी तक रेट बढ़ाने के लिए ज्वाइंट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन (जेईआरसी) को याचिका दी थी।
जेईआरसी ने इसे खारिज कर दिया था मगर चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया था कि मतदान तक जेईआरसी कोई आदेश जारी न करे।
मतदान के अगले दिन शुक्रवार को जेईआरसी के चेयरमैन एसके चतुर्वेदी ने 214 पृष्ठों के आदेश में स्पष्ट किया कि बिजली विभाग के पास सरप्लस 74.89 करोड़ की राशि बची है।
ऐसे में बिजली के रेट में बढ़ोतरी की कोई जरूरत नहीं है। जेईआरसी के इस आदेश के बाद शहर के लोगों का बिजली का बिल एक साल और नहीं बढ़ेगा। जेईआरसी ने अपने आदेश में प्रशासन से बिजली विभाग को कई और सुझाव भी दिए हैं। बिजली के रेट इसलिए भी नहीं बढ़ाए गए प्रशासन ने जेईआरसी के निर्देश पर अपने अकाउंट्स का कामर्शियल ऑडिट नहीं कराया। पिछले वित्त वर्ष में भी प्रशासन ने ऑडिट नहीं कराया था।
यह थी प्रशासन की याचिका
प्रशासन ने चंडीगढ़ में एक अप्रैल से बिजली के रेट 21 फीसदी तक बढ़ाने को लेकर जेईआरसी के पास 20 जनवरी को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। प्रशासन ने अपनी याचिका में पहले की तरह तीन स्लैब ही रखे थे।
घरेलू उपभोक्ताओं से 150 यूनिट तक 2.30 रुपये प्रति यूनिट की जगह 2.78 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव था। 150 से 400 यूनिट के लिए उपभोक्ताओं से 4.20 रुपये प्रति यूनिट की जगह 4.60 रुपये प्रति यूनिट लेने का प्रस्ताव है। 400 से ऊपर यूनिट खर्च होने पर उपभोक्ताओं से 4.40 रुपये प्रति यूनिट की जगह 4.95 रुपये प्रति यूनिट लेने का प्रस्ताव था। कामर्शियल उपभोक्ताओं से 150 यूनिट के लिए 4.30 की जगह 4.70 और 150 से 400 यूनिट के लिए 4.50 रुपये प्रति यूनिट की जगह 5.30 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव है। 400 से ऊपर यूनिट के लिए उन्हें 4.70 रुपये प्रति यूनिट की जगह 5.70 रुपये प्रति यूनिट करने का प्रस्ताव था।