चंडीगढ़। दीपावली त्योहार की खरीदारी के लिए शनिवार को शहर के बाजारों में बेतहाशा भीड़ रही। लोगों ने सजावटी सामान, दीए, बतासे, कपड़े, गिफ्ट आइटम सहित वस्तुएं खरीदीं। त्योहार को लेकर हर ओर हर्ष और उल्लास का माहौल है। कार्तिक अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व पर रविवार को दोपहर बाद 2.40 बजे के बाद अमावस्या का शुभारंभ होगा। शाम के समय दिवाली पर्व स्वाति नक्षत्र, सौभाग्य योग, तुला राशि का चंद्रमा और अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या युक्त होने के कारण प्रशस्त और शुभ होगा। यह बात श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख और कर्मकांडी पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही। उन्होंने कहा कि दिवाली पर प्रदोष काल चंडीगढ़ में सूर्यास्त के शाम 5.22 लेकर रात 8.05 बजे करीब दो घंटा 42 मिनट तक प्रदोष काल रहेगा।
सेक्टर- 30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री ने बताया कि शाम 5.39 बजे से स्थिर लग्न बृष विशेषकर शुभ रहेगा। प्रदोष काल का आरंभ से शुभ की चौघड़िया शाम 7.08 बजे तक रहेगी। इसके बाद अमृत की चौघड़िया 8.09 बजे तक रहेगी। यह शुभ है। इसलिए शाम 5.39 बजे से श्री गणेश पूजा और श्री लक्ष्मी पूजन आरंभ करना चाहिए। वहीं, श्री देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के अध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि इस समय में दीप जलाना, महालक्ष्मी पूजन, कुबेर पूजन, बही खाता पूजन, घर में दीप पूजन करने के बाद दीप जलाना शुभ रहेगा।
रात्रि काल या निशीथकाल
12 नवंबर को रात्रिकाल या निशीथकाल रात 8.09 से रात 10.51 बजे तक रहेगा। रात्रि काल में मिथुन लग्न रात्रि 9.48 बजे तक रहेगा। 9.48 से रात 12.11 बजे तक कर्क लग्न भी शुभ रहेगा। रात्रिकाल में चर और शुभ की चौघड़िया शुभ रहेगी। इसलिए इस बार प्रदोष काल से प्रारंभ होकर रात 10.30 बजे तक का समय अत्यंत शुभ और सिद्धि कारक है। इस काल में श्री सुक्त, कनकधारा स्तोत्र और लक्ष्मी स्तोत्र का पाठ करना शुभ रहेगा।
महानिशीथ काल
रात 10.31 से अर्धरात्रि 1.33 बजे तक महारात्रिकाल रहेगा। इस समय में रोग और काल की चौघड़िया होने के कारण शुभ नही है। इसलिए इस समय में पूजा हवन और स्तोत्र का पाठ नहीं करना चाहिए। इस समय में काली उपासना, तंत्र आदि क्रियाएं करना शुभ रहेगा।