चंडीगढ़। सेक्टर-26 सब्जी मंडी से जुड़े फल-सब्जी वेंडरों की लंबे समय से चली आ रही समस्या को लेकर अब समाधान की दिशा में प्रक्रिया तेज होती दिख रही है। नगर निगम के जॉइंट कमिश्नर हिमांशु गुप्ता ने पिछले दिनों सेक्टर-26 सब्जी मंडी का दौरा किया। इस दौरान मंडी के पीछे नगर निगम अपनी खाली पड़ी जमीन को वेंडरों को स्थान देने पर विचार कर रहा है। इसको लेकर सहमति बनती नजर आई।
दरअसल, मंडी के वेंडरों का कहना है कि उन्होंने नगर निगम में करीब दो करोड़ रुपये फीस और लाइसेंस के रूप में जमा कराए हैं, इसके बावजूद पिछले चार महीनों से उन्हें काम करने की जगह नहीं दी जा रही। मंडी को नो-वेंडिंग जोन घोषित किए जाने के बाद सैकड़ों वेंडर बेरोजगार हो गए हैं जिससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वेंडर इसको लेकर सांसद मनीष तिवारी और मेयर हरप्रीत कौर बबला से भी गुहार लगा चुके हैं। हालांकि जॉइंट कमिश्नर के दौरे के बाद मंडी के पीछे उपलब्ध जमीन पर वेंडरों को शिफ्ट करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। मेयर का कहना है कि जल्द ही कोई ठोस समाधान निकालकर वेंडरों को राहत दी जाएगी।
सेक्टर-26 सब्जी मंडी नो-वेंडिंग जोन घोषित
प्रशासन ने सेक्टर-26 सब्जी मंडी को नो-वेंडिंग जोन घोषित कर दिया है। इसके चलते मंडी में वर्षों से फल और सब्जी बेच रहे सैकड़ों पंजीकृत वेंडरों को वहां काम करने की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने भी यहां का दौरा कर मंडी को नो वेंडिंग जोन घोषित करने की बात कही थी। उसके बाद भी मंडी में दुकान लगाने की अनुमति नहीं मिल रही है। अब वेंडर रवि, जावेद, सुलेमान समेत कई लोगों का कहना है कि नो-वेंडिंग जोन घोषित होने के बाद उनकी रोजी-रोटी पूरी तरह से बंद हो गई है और वे पिछले चार महीनों से बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। एक- एक वेंडरों ने 80 हजार से ढाई लाख रुपये की फीस जमा कर चुका है।