-नगर परिषद सिरसा के कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़ने का सेतिया ने किया था दावा
-जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल व सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने का दर्ज हुआ था केस
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। नगर परिषद सिरसा में हंगामे के दौरान गोकुल सेतिया पर जातिसूचक शब्द इस्तेमाल करने और सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के आरोप में दर्ज एफआईआर में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने उन्हें बड़ी राहत देते हुए उनकी जमानत याचिका मंजूर कर ली है। इससे पहले उन्हें हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत का लाभ दे दिया था। याचिका दाखिल करते हुए युवा नेता गोकुल सेतिया ने बताया कि वह अपने साथियों के साथ 11 जनवरी को नगर परिषद कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने एक कर्मचारी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया। इसके बाद अन्य कर्मचारी भी उसके पक्ष में आ गए और हंगामा होने लगा। याची ने बताया कि इसके बाद याचिकाकर्ता के खिलाफ दबाव बनाया गया और एससी/एसटी एक्ट व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का मामला दर्ज करवा दिया गया। याची ने बताया कि इस मामले में वह बेकसूर है। जिस समय हंगामा चल रहा था उस समय पुलिस अधिकारी वहां मौजूद थे। यदि याची ने कुछ गलत किया होता तो पुलिस वहीं उसे गिरफ्तार कर सकती थी। याची ने बताया कि अब पुलिस उसे गिरफ्तार करना चाहती है जबकि कानून में तय है कि जिस अपराध की अधिकतम सजा 7 साल से कम हो उसमें ऑटोमेटिक गिरफ्तारी नहींं की जानी चाहिए। यदि गिरफ्तार करना है तो तय प्रक्रिया के तहत नोटिस देना जरूरी है। याची समाज का सम्मानित व्यक्ति है और जांच में शामिल होने को तैयार है। हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद याचिका पर फैसला सुनाते हुए इसे मंजूर कर सेतिया को जमानत दे दी है।