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भगवान भाव के भूखे, भक्तों के द्वार-द्वार पर अलख जगाते हैं : संयोगिता भारती

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चंडीगढ़। भक्त नामदेव भगवान विट्ठल के बहुत बड़े भक्त थे। उनसे प्रगाढ़ प्रेम करते थे। भगवान विट्ठल उनके भावों को स्वीकार करने के लिए कई बार मूर्ति से प्रकट हुए क्योंकि भगवान तो भाव के भूखे होते हैं। खुद प्रेमस्वरूप भगवान प्रेमावतार लेकर भक्तों के द्वार-द्वार पर अलख जगाते हैं। यह प्रवचन सेक्टर-31 के श्री कार्तिकेय स्वामी मंदिर में साध्वी संयोगिता भारती ने श्री हरिकथा के तीसरे और अंतिम दिन दिया।
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उन्होंने कहा कि इसी प्रेम को ग्रहण करने के लिए प्रभु कभी विदुर के घर साग खाते हैं तो कभी शबरी के जूठे बेरों का भोग लगाते हैं। इसी प्रेम के वशीभूत होकर भगवान विट्ठल नामदेव के समक्ष भी प्रकट होते हैं और उन्हें भक्ति का शाश्वत मार्ग प्राप्त करने के लिए कहते हैं।
उन्होंने प्रवचन के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को कहा कि भक्त नामदेव ने भक्ति के शाश्वत मार्ग को प्राप्त करने के लिए गुरु विशोबा खेचर की शरण को प्राप्त किया। गुरु विशोबा खेचर ने उन्हें चार पदार्थो का ज्ञान प्रदान किया।
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कथा के बाद हुई आरती
साध्वी ने बताया कि श्रीहरि के चार हाथ इन्हीं चार पदार्थों की ओर संकेत करते हैं। उनके एक हाथ में है शंख, एक में चक्र, एक में पद्म और एक में गदा है। सुदर्शन चक्र प्रकाश का प्रतीक जबकि शंख अनहद नाद का, पद्म अमृत का और गदा प्रभु के शाश्वत नाम का प्रतीक है। कथा के उपरांत भगवान की आरती हुई और प्रसाद बांटा गया।
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