जीएमसीएच-32 के पीजी प्रवेश प्रक्रिया में एक के बाद एक गड़बड़ी सामने आने के बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। इसे लेकर राघव गुप्ता नाम के व्यक्ति ने वीरवार को हाईकोर्ट में केस फाइल किया है, जिससे मामले ने और तूल पकड़ लिया है।
वहीं, दूसरी ओर आधे से ज्यादा आवेदन फार्म में मिली कमियों को ध्यान में रखते हुए कॉलेज प्रशासन की तरफ से त्रुटि सुधार के लिए दी गई समय अवधि बढ़ाए जाने ने गड़बड़ी की आशंका को और मजबूती दी है।
विद्यार्थियों का कहना है कि एक बार प्रोस्पेक्टस जारी हो जाने के बाद उसमें दी गई समय अवधि को नहीं बदला जा सकता, जब तक कि प्रशासन स्तर पर किसी बड़ी चूक के बाद इसका निर्णय न लिया जाए। ऐसी स्थिति में डोमिसाइल संबंधी गड़बड़ी के सामने आने पर आनन-फानन में कॉलेज प्रशासन ने अपने स्तर पर तिथि बढ़ाई है, जिससे गड़बड़ी की आशंका और मजबूत हो रही है, क्योंकि अब कॉलेज प्रशासन अपनी कमियों को छुपाने के उपाय तलाशने में जुट गया है।
गौरतलब है कि आवेदन फार्म में गड़बड़ियों और कमियों को दूर करने के लिए प्रोस्पेक्टस में 20 नवंबर की तिथि तय की गई थी, जो अंतिम दिन प्रवेश समिति की देर शाम बैठक के बाद 22 तक बढ़ा दिया गया है। विद्यार्थियों का कहना है कि कॉलेज में जब यूजी दाखिले के प्रोस्पेक्टस में डोमिसाइल अंडरटेकिंग देने का मानक शामिल है तो फिर अब तक पीजी के प्रोस्पेक्टस में इसे क्यों नहीं किया गया। इस सवाल का जवाब इस बार के बदलाव के बाद शुरू हुए बवाल से साफ नजर आ रहा है।