चंडीगढ़। जीएमसीएच-32 में प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव करते हुए यूटी प्रशासन ने डायरेक्टर प्रिंसिपल की नियुक्ति पारंपरिक वरिष्ठता के बजाय मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। प्रस्ताव फिलहाल पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक की अंतिम स्वीकृति के लिए लंबित है। यह फैसला प्रो. जीपी थामी का कार्यकाल पूरा होने के बाद लिया गया।
वरिष्ठता क्रम के अनुसार मौजूदा मेडिकल सुपरिंटेंडेंट प्रो. दासरी हरिश का नाम आगे था। सूत्रों के अनुसार उनका कार्यकाल लगभग पांच माह में समाप्त होने वाला है। ऐसे में प्रशासन ने दीर्घकालिक और परिणाम आधारित नेतृत्व की जरूरत को देखते हुए चयन प्रक्रिया में बदलाव का कदम उठाया है। सूत्रों के मुताबिक हाल ही में अस्पताल के इमरजेंसी और ट्रॉमा विंग में गंभीर संचालन संबंधी कमियों की जानकारी प्रशासक को दी गई थी। वेंटिलेटर और तकनीकी स्टाफ की कमी के चलते मरीजों के परिजनों द्वारा मैन्युअली अंबु बैग चलाने की घटनाओं ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। इसके बाद प्रशासन ने मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा कर चयन प्रक्रिया में बदलाव का संकेत दिया।
हाई-लेवल पैनल ने सुझाए दो नाम
यूटी के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय पैनल ने शीर्ष पद के लिए डॉ. रवनीत कौर और डॉ. सुरेश के नाम की सिफारिश की है। सूत्रों का कहना है कि डॉ. रवनीत कौर का नाम प्राथमिकता सूची में है और उनके पक्ष में मजबूत अनुशंसा की गई है। हालांकि संस्थान के कुछ फैकल्टी सदस्यों ने वरिष्ठता पर आधारित परंपरा से हटने पर आपत्ति जताई है, वहीं एक वर्ग का मानना है कि क्लिनिकल परिणाम, शोध उपलब्धियों और प्रशासनिक अनुभव को प्राथमिकता देना संस्थान की कार्यक्षमता बहाल करने के लिए जरूरी है।