मरीज बनकर पहुंचा अमर उजाला संवाददाता
इसकी हकीकत जानने के लिए अमर उजाला संवाददाता मरीज बनकर रात लगभग 12 बजे जीएमसीएच-32 पहुंचा और पर्ची बनवाने से लेकर परामर्श और इलाज तक की सारी प्रक्रिया देखी। डॉक्टर से मिलने पर पूरी बात भी नहीं सुनी और दवा की पर्ची लिखकर थमा दी। उसके बार-बार कहने के बावजूद इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर ने कोई बात नहीं सुनी। कहा-कल सुबह आना। इसके बाद संवाददाता ने अस्पताल के कई वार्डों और परिसर का दौरा किया और कुछ मरीजों से बात की।
एक ही बेड पर दो-दो प्रसूताएं
ग्राउंड फ्लोर पर बने वेटिंग रूम में 10 डिग्री की ठंड में लोग कंबल ओढ़कर सो रहे थे। कुछ लोग इलाज करवाने के लिए इधर-उधर घूम रहे थे। वेटिंग रूम में बैठे खरड़ निवासी मनदीप सिंह ने बताया कि 12 जनवरी को उनकी पत्नी की डिलीवरी हुई थी। पत्नी गायनी वार्ड में भर्ती है। एक ही बेड पर दो महिलाओं को लेटना पड़ रहा है। बच्चे भी उनके साथ बेड पर हैं। उनकी पत्नी को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल को कम से कम प्रसूताओं को बेड अलग-अलग देना चाहिए। उसकी पत्नी को खरड़ अस्पताल से सेक्टर 32 रेफर किया गया।
बदसलूकी का लगाया आरोप
लुधियाना के गांव रामपुर से आए रवि सिंह का कहना है कि वह दादा प्रितपाल सिंह का इलाज करवाने आए हैं। उनके दादा को बड़ा फोड़ा हो गया है। वहां से इलाज के लिए चंडीगढ़ रेफर किया गया। इमरजेंसी में 20 नंबर कमरे में भेजा गया। वहां तैनात डॉक्टर दर्द वाली जगह पर छूकर कहा कुछ तो नहीं है। थोड़ी सी तकलीफ हुई नहीं कि पहुंच गए जीएमसीएच-32 इलाज करवाने। इसके साथ काफी डांट फटकार लगाई और बदसलूकी भी की। उन्होंने एक पुरुष डॉक्टर से इसकी शिकायत भी की। डॉक्टर ने कहा कि लंबी ड्यूटी के तनाव में बोल दिया होगा। आप इलाज करवाओ। डॉक्टर ने दादा का अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए इमरजेंसी सेक्शन में भेजा लेकिन वहां पर्ची पर सुबह 9 बजे का समय डालकर इंतजार करने के लिए कह दिया गया।
इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को इलाज की सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। इमरजेंसी में मरीजों का पंजीकरण के बजाय इलाज पर फोकस होता है। अगर मरीजों को कोई समस्या आ रही है तो उसमें सुधार करेंगे।
- एके अत्री, जीएमसीएच-32 के प्रिंसिपल निदेशक