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Chandigarh News: गमाडा ने रोके 663 करोड़, शहर का रुका विकास

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सड़क, सीवरेज, स्ट्रीट लाइट और पार्कों के काम प्रभावित, निगम ने बकाया राशि जारी करने के लिए लिखा पत्र
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माई सिटी रिपोर्टर
मोहाली। शहर के विकास कार्यों को गति देने के लिए नगर निगम को मिलने वाली बड़ी राशि लंबे समय से अटकी हुई है। ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गमाडा) की ओर से नगर निगम के करीब 663 करोड़ रुपये का भुगतान लंबित होने का असर शहर की विकास परियोजनाओं पर पड़ रहा है। सड़क निर्माण, सीवरेज नेटवर्क के विस्तार, स्ट्रीट लाइट और पार्कों के सुंदरीकरण समेत कई काम प्रभावित हो रहे हैं। नगर निगम ने अब गमाडा को पत्र लिखकर 678.68 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी करने की मांग की है। निगम के अनुसार, 2011 में हुए समझौते के तहत शहर में विकास कार्यों पर होने वाले खर्च में गमाडा की हिस्सेदारी तय की गई थी। इसके अलावा स्क्रूटनी फीस और नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस में भी निगम को हिस्सा मिलना था। निगम का दावा है कि वर्षों से पूरी राशि नहीं मिलने के कारण बकाया लगातार बढ़ता गया है।
सड़क से लेकर सीवरेज तक काम प्रभावित
निगम की ओर से शहर की जर्जर सड़कों की मरम्मत और निर्माण, नए क्षेत्रों में सीवरेज नेटवर्क का विस्तार, खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करने और पार्कों के रखरखाव व सुंदरीकरण की योजनाएं तैयार की गई हैं। पर्याप्त फंड नहीं मिलने के कारण कई परियोजनाएं शुरू नहीं हो पा रही हैं, जबकि कुछ की रफ्तार धीमी है। शहर के कई हिस्सों में खराब सड़कों के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। बरसात के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ जाती है। वहीं, कई क्षेत्रों में सीवरेज व्यवस्था को मजबूत करने और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
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2011 के समझौते का दिया हवाला

नगर निगम ने गमाडा को भेजे पत्र में 8 जुलाई 2011 को राज्य सरकार की मौजूदगी में हुए समझौते का हवाला दिया है। निगम के मुताबिक इसमें स्क्रूटनी फीस, नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस और विकास कार्यों में गमाडा की हिस्सेदारी तय की गई थी। निगम ने वित्तीय रिकॉर्ड के आधार पर लंबित राशि जारी करने की मांग की है।



665 करोड़ रुपये से अधिक का दावा
निगम के अनुसार करीब 45 करोड़ रुपये स्क्रूटनी फीस, 224 करोड़ रुपये नॉन-कंस्ट्रक्शन फीस, विकास कार्यों के लिए 25 फीसदी हिस्सेदारी के करीब 300 करोड़ रुपये और वर्ष 2025 के विकास कार्यों के करीब 80 करोड़ रुपये समेत कुल 665 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लंबित है। निगम ने अलग-अलग मदों का हिसाब गमाडा को भेजा है।
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गमाडा ने कहा- जांच के बाद होगा भुगतान

गमाडा के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर संदीप ऋषि ने कहा कि निगम का पत्र मिल गया है। दावे की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार जो राशि बनती होगी, उसका भुगतान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आगामी प्रॉपर्टी ऑक्शन से राजस्व मिलने के बाद उपलब्ध फंड के अनुसार निगम को राशि दी जाएगी।



नगर निगम कमिश्नर संदीप सिंह ने कहा कि गमाडा से समय पर राशि मिलने से शहर के विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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