-5 से लेकर 20 अंकों तक का दिया जाता था लाभ,
-60 हजार पदों पर भर्तियां होंगी प्रभावित
-82 याचिकाओं का एक साथ निपटारा, सीईटी व टीजीटी भर्ती भी इसमें शामिल
-कोर्ट ने कहा-यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 16 के खिलाफ, सभी को बराबरी का अधिकार
आदेश के मुख्य बिंदू
-आर्थिक व सामाजिक आधार पर किसी भी भर्ती में अंकों के रूप में किसी आवेदक को लाभ नहीं मिल सकेगा।
-जिन भर्तियों में नियुक्ति हो चुकी हैंं, उनमें अंकों का लाभ पाने वालों को 6 माह की मोहलत परीक्षा पास करने के लिए दी जाएगी।
-जिन भर्तियों में मेरिट सूची तैयार हो चुकी है, उसमें दोबारा परीक्षा आयोजित की जाएगी।
-जो भर्तियां हाईकोर्ट के आदेश के कारण रुकी हुई थी उन्हें बिना इन अंकों का लाभ दिए मेरिट तैयार कर पूरा किया जाएगा।
-
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने ग्रुप सी और डी की सरकारी नौकरियों में सामाजिक व आर्थिक आधार पर दिए जाते अतिरिक्त अंकों के लाभ को अवैध करार दिया है। हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए कोर्ट ने सरकार की तरफ से जारी अधिसूचना को असांविधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया। खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस प्रकार का विशेष प्रावधान करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 16 में दिए गए समानता के अधिकार के खिलाफ है। कोर्ट के इस फैसले से ग्रुप सी और ग्रुप डी की 60 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां प्रभावित होंगी। इनमें 20 हजार वे अभ्यर्थी भी शामिल हैं, जो नियुक्तियां ले चुके हैं और कई महीनों से विभिन्न विभागों में नौकरी कर रहे हैं। अब ग्रुप सी की श्रेणी 1, 2, 56 व 57 के लिए दोबारा परीक्षा कराई जाएगी और मेरिट भी नए सिरे से बनेगी। हाईकोर्ट ने नियुक्ति ले चुके चयनितों को भी आगामी छह माह में दोबारा से परीक्षा देने के लिए कहा है। हालांकि, विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है। दूसरी तरफ, हरियाणा सरकार के एडवोकेट जनरल बलदेव राज महाजन ने कहा कि आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद इसका अध्यन कर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाएगा।
सरकार की तरफ से आर्थिक व सामाजिक आधार पर 5 से लेकर 20 नंबर दिए जाते हैं। इन अंकों को एक प्रकार से आरक्षण बताते हुए सबसे पहले जनवरी 2023 में असिस्टेंट इंजीनियरों (अर्पित गहलावत मामला) की भर्ती में चुनौती दी गई थी। उस समय हाईकोर्ट ने अंकों का लाभ देने पर रोक लगाते हुए हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर दिया था। इसके बाद लगातार जो भी भर्ती निकली, उसमें अर्पित गहलावत मामले का हवाला देते हुए इन अंकों का लाभ देने पर रोक लगाने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील यह थी कि इस प्रकार किसी को अंकों का लाभ देना बाकी लोगों को मेरिट में ऊंचा होने के बावजूद भर्ती से बाहर करने जैसा होगा। साथ ही यह एक प्रकार से आरक्षण देना है और हरियाणा में पहले से ही विभिन्न वर्गों को आरक्षण है। यदि इसे आरक्षण माना जाए तो कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक हो जाता है जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती। ऐसे में हाईकोर्ट में ग्रुप सी, डी व टीजीटी भर्ती में आर्थिक व सामाजिक आधार पर आरक्षण को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं विचाराधीन थी। इसके साथ ही सीईटी की परीक्षा को लेकर सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ हरियाणा कर्मचारी आयोग की अपील भी विचाराधीन थी। शुक्रवार को हाईकोर्ट ने कुल 82 याचिकाओं का एक साथ निपटारा कर दिया है।
ग्रुप सी के 10,240 लोग कर चुके ज्वाइनहरियाणा कर्मचारी चयन आयोग ने ग्रुप सी की 32 हजार से अधिक पदों के लिए 400 से अधिक श्रेणियों के लिए 64 ग्रुप बनाए थे और अलग अलग ग्रुप के हिसाब से परीक्षा ली गई थी। इनमें से टीजीटी की भर्ती और ग्रुप 56 व 56 (क्लर्क और पटवारी) के पदों को छोड़कर अन्य पदों के लिए परिणाम जारी करके 10,240 पदों पर नियुक्तियां भी दी जा चुकी हैं। आयोग ने अब तक 39 श्रेणियों के परिणाम जारी किए हैं। इनमें से 20 कैटेगरी ऐसी हैं, जिनमें आयोग को 4 गुणा अभ्यर्थी नहीं मिले थे और ये अधिकतर वे अभ्यर्थी हैं, जो बिना आर्थिक सामाजिक अंक लिए बनी मेरिट पर ज्वाइन किए हैं। ऐसे में इनके लिए राहत की बात है। वहीं, 56 व 57 ग्रुप के 13,500 पद और टीजीटी के 7200 पदों पर अंतिम परिणाम जारी नहीं हो पाया है। 56 व 57 में 41 प्रश्न दोहराये जाने को लेकर विवाद है और यह मामला भी हाईकोर्ट में विचाराधीन है।
हजारों अभ्यर्थियों की मेरिट होगी प्रभावित
ग्रुप सी श्रेणी 1, 2, 56 व 57 के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित कराने और नए सिरे से मेरिट बनाने के लिए आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के फैसले के बाद अगर आयोग ने दोबारा परीक्षा ली और नए सिरे से मेरिट तैयार की तो इससे हजारों की संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित होंगे, क्योंकि ऐसे में काफी संख्या में चयनित अभ्यर्थी मेरिट सूची से बाहर जा सकते हैं, जबकि काफी संख्या में मेरिट सूची में आ सकते हैं।
फैसले के मायने
-भविष्य में ग्रुप सी और डी की नौकरियों में आर्थिक-सामाजिक आधार पर अंक नहीं मिलेंगे।
-2019 से पहले जो भी युवा भर्ती हुए हैं, उनको कोई खतरा नहीं है और यह फैसला उनको प्रभावित नहीं करेगा।
-सीईटी के तहत हुई भर्तियों में जो 12 हजार युवा नौकरी पर लग गए हैं, उनकी नौकरी पर तलवार लटक गई है।
-ग्रुप सी और डी के सभी ग्रुपों की दोबारा परीक्षा होगा, पास करने वालों की ही नौकरी बचेगी
ये किया था प्रावधान
हरियाणा सरकार ने नौकरियों में आर्थिक रूप से कमजोर, जिनके घरों में पहले से सरकारी नौकरी नहीं है या जिनके माता-पिता का निधन हो चुका है, उनको अतिरिक्त पांच अंकों का प्रावधान किया था। परीक्षा में अतिरिक्त अंक मिलने के चलते ऐसी श्रेणियों के काफी संख्या में अभ्यर्थियों के चयन हुए हैं। इसके खिलाफ उन युवाओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जो इस श्रेणी से बाहर आते हैं।