पंजाब सरकार ने 16 शहरों का भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) आधारित डिजिटल मास्टर प्लान तैयार कर लिया है, जिससे अब लोगों के लिए लैंड यूज सर्टिफिकेट (सीएलयू) लेना आसान हो जाएगा।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) इस काम के लिए पोर्टल तैयार कर रहा है, जिससे अब लोगों को अपनी भूमि की जानकारी जुटाने के लिए नगर निकायों के दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। साथ ही मास्टर प्लान के डिजिटल होने से अब बिल्डर स्वीकृत नक्शे के बाहर जाकर निर्माण नहीं कर पाएंगे।
पंजाब म्युनिसिपल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कंपनी ने इस काम को पूरा किया है। केंद्र सरकार ने अटल कायाकल्प और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) के तहत पंजाब के 16 शहरों को चुना था। ये शहर अबोहर, अमृतसर, बरनाला, बटाला, बठिंडा, फिरोजपुर, होशियारपुर, जालंधर, खन्ना, लुधियाना, मालेरकोटला, मोगा, श्री मुक्तसर साहिब, पटियाला, पठानकोट और मोहाली हैं। इस योजना के तहत ही मास्टर प्लान को डिजिटाइज्ड करने का काम पूरा किया गया है।
अभी लोगों को भूमि के उपयोग संबंधी जानकारी जुटाने और लैंड यूज सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए नगर निकायों के कार्यालयों में जाना पड़ता है, जिसके बाद ही वह सीएलयू के लिए आवेदन करते हैं। डिजिटल रिकाॅर्ड उपलब्ध न होने के कारण इस प्रक्रिया में कई बार काफी समय लग जाता है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। पाेर्टल तैयार होने के बाद यह एक बड़ी समस्या हल हो जाएगी। लोग ऑनलाइन ही चेक कर सकेंगे कि वे अपनी भूमि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए कर सकते हैं। इसके बाद ही सीएलयू के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अवैध निर्माण पर रखी जा सकेगी नजर
इसी तरह जीआईएस आधारित मास्टर प्लान से अब अवैध निर्माण पर भी नजर रखी जा सकेगी। अगर बिल्डर स्वीकृत नक्शे से बाहर जाकर किसी भी तरह का निर्माण करेगा तो वह विभाग के नक्शे से पकड़ में आ जाएगा। राजस्व विभाग का पूरा रिकाॅर्ड को भी इसके साथ जोड़ा जाएगा। जीआईएस की मदद से सैटेलाइट और ड्रोन की इमेज का इस्तेमाल करके मास्टर प्लान को किसी भी समय अपडेट किया जा सकता है। इससे अब भूमि संबंधित विवादों का भी निपटारा हो जाएगा। लोगों को पता होगा कि मास्टर प्लान के तहत उनकी भूमि किस परियोजना के लिए आरक्षित है। वह उसी के मुताबिक भूमि के उपयोग पर आगे बढ़ सकेंगे और अपना निवेश कर सकेंगे। दरअसल भूमि के उपयोग को लेकर स्पष्टता आ जाएगी। ऑनलाइन ही भूमि मालिक यह जानकारी जुटा सकेंगे कि उनकी जमीन के पास से कोई हाईवे या बड़ी परियोजना की योजना तो नहीं है।
वैकल्पिक योजनाएं बनाई जा सकेंगी
बदलते समय से समस्याएं भी बदल रहीं हैं। जीआईएस बेस्ड मास्टर प्लान से हर समय विभाग इन समस्याओं से अपडेट रह सकेंगे। साथ ही वैकल्पिक योजनाएं भी तैयार कर सकेंगे। साथ ही एक डैशबोर्ड भी तैयार किया जाएगा, जिसकी मदद से टाउन प्लानिंग विभाग निर्णय ले सकेंगे। इससे वह हर समय स्थिति की निगरानी कर सकेंगे और उसी के मुताबिक ही आगे परियोजनाओं व नीति पर काम कर सकेंगे।
पंजाब सरकार ने अपने सभी शहरों का मास्टर प्लान तैयार किया है। 2031 तक का मास्टर प्लान बनाया गया हैं, जिसमें औद्योगिक, व्यावसायिक, आवासीय जोन के बारे में जानकारी दी गई है कि कैसे सरकार की तरफ से ये परियोजनाएं पूरी की जाएंगी। साथ ही अस्पताल, स्कूल, विश्वविद्यालय, इंडस्ट्री, हाईवे समेत अन्य बड़ी परियोजनाओं के बारे में भी इसमें जानकारी शामिल की गई है।