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छोटा सा ब्रोकर जो बन गया बड़े ग्रुप का सीएमडी

Fri, 30 May 2014 03:11 PM IST
अरविंद बाजपेयी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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आपने गिल्को ग्रुप आफ कंपनीज के बड़े बड़े आशियाने जरूर देखे होंगे पर उसके पीछे छिपी कठिन तपस्या शायद ही जानते हों। यह तपस्या है रोपड़ के नजदीक एक छोटे से गांव माजरी जट्टा के रहने वाले रंजीत सिंह गिल की। जिन्होंने अपना कैरियर शुरू किया एक आढ़त से और अब बन गए हैं गिल्को ग्रुप आफ कंपनीज के सीएमडी। बेशक रंजीत की कंपनी आसमान की ऊंचाइयां छू रही है पर उनके पांव अभी भी जमीन पर हैं।
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गरीबों की मदद करना, बच्चों को पढ़ाना और महिला सशिक्तकरण पर उनका हमेशा ध्यान रहता है। उनकी इन खूबियों को देखते हुए ही उनको बिल्डर आफ द इयर और बेस्ट बिल्डर के आवार्ड से नवाजा जा चुका है।

गिल बताते हैं कि उनका यह सफर आसान नहीं रहा। तीन बहनों के बीच वह अकेले भाई थे। पिता फौजी, जिनका रिटायरमेंट सूबेदार मेजर पद से हुआ। ऐसे में बिजनेस से तो परिवार का दूर दूर तक नाता नहीं था। गांव के मिडल स्कूल से एजूकेशन पूरी की फिर सरकारी कालेज से ग्रेजुएशन की।
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ग्रेजुएशन करने के बाद विचार आया और 1985 में धान की आढ़त कर ली। दो साल कमाई की और अपनी मेहनत के पैसों से ईंट का भट्टा लगा दिया। एक भट्टा लगाया और किस्मत की बात कि ईंट के दाम बढ़ गए। वर्ष 1988 में ईंटों का दूसरा भट्टा लगा दिया।

बारह एकड़ जमीन से टाप पर
रंजीत सिंह गिल ने कहा कि उनके पास गांव में 12 एकड़ जमीन थी। इस जमीन पर थोड़ी बहुत खेती होती थी। उन्होंने बताया कि ईंटों का भट्टा लगाया और उससे जो लाभ हुआ वह और दोस्तों के सहयोग से मिलकर रोपड़ में पहला प्रोजेक्ट शुरू किया। पहला प्रोजेक्ट शुरू किया तो रात रात भर खड़े रहते थे।

2004 में दोस्तों का सहयोग लिया। उस समय जमीन खरीदी तो रेट्स कम थे, फिर रेट्स बढ़ गए। रंजीत सिंह गिल ने बताया कि मोहाली के सेक्टर-127 में गिल्को वैली की नींव रखी। उसमें टाउनशिप, गिल्को विला, गिल्को टावर, गिल्को हाईट्स, गिल्को बजट होम बनाया। अब गिल्को ग्रीन की नींव डालने जा रहे हैं।

पहले एकला चलो, अब फौज
रंजीत सिंह गिल ने कहा कि आढ़त और ईंटों का भट्टा लगाने तक वह अकेले ही चलते रहे, लेकिन जब गिल्को वैली की नींव डाली तो उनको स्टाफ की आवश्यकता हुई। स्टाफ चाहिए था और उसको देने के लिए तनख्वाह की व्यवस्था भी करनी थी। यह थोड़ा टेढ़ा मामला था, लेकिन इसके बगैर प्रोजेक्ट पूरा नहीं हो सकता था। उन्होंने अपनी टीम में टाप इंजीनियर्स, वर्कर्स को शामिल किया।

सफलता का राज है ईमानदारी
रंजीत सिंह गिल ने कहा कि उनकी सफलता का श्रेय जाता है ईमानदारी और निष्ठा को। उन्होंने कहा कि जितने प्रोजेक्ट बनाए उसमें से ज्यादातर प्रोजेक्ट की डिलीवरी समय पर की। अब सेक्टर-115 डेवलप किया है। उसमें सत्तर एकड़ में प्लाटिंग की है जिसमें गिल्को फार्म हाउस बना रहे हैं।

एजूकेशनल इंस्टीट्यूट भी खोला
रंजीत सिंह गिल ने कहा कि उन्होंने गिल्को इंटरनेशनल स्कूल सेक्टर-117 में बनाया। जिसको उनका लंदन रिटर्न बेटा अमनदीप सिंह गिल देखता है। अब सेक्टर-117 में 1160 करोड़ का प्रोजेक्ट सेटअप किया है। इसकी क्लीयरेंस ली जा रही हैं।
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