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गर्भावस्था में 20 हफ्ते से पहले जेनेटिक स्क्रीनिंग बेहद जरूरी : डॉ. हरप्रीत

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चंडीगढ़। 100 में से लगभग एक या दो बच्चों में जेनेटिक डिफेक्ट्स होता है, लेकिन सभी जेनेटिक डिफेक्ट प्रेग्नेंसी को टर्मिनेट करने की आवश्यकता नहीं होती। इस स्थिति से बचाव के लिए जरूरी है की प्रेग्नेंसी का पता लगने पर 20 हफ्ते से पहले जेनेटिक्स की स्क्रीनिंग हो जाए ताकि कोई भी बर्थ डिफेक्ट छूट न सके। यह बातें डॉ. हरप्रीत ने रविवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन व मदरहुड चैतन्य अस्पताल की ओर से सेक्टर-35 स्थित एक होटल में आयोजित ट्राइसिटी पेरिनेटोलॉजी मीट कार्यक्रम में कहीं।डॉ. हरप्रीत ने बताया कि यदि किसी को जेनेटिक्स की हिस्ट्री हो तो उन्हें प्रेग्नेंसी प्लान करने से पहले ही विशेषज्ञ से काउंसलिंग के लिए मिल लेना चाहिए। उनका कहना है कि गर्भावस्था के दौरान अल्ट्रासाउंड का विशेष महत्व है। इसलिए जैसे ही गर्भ धारण करने की पुष्टि हो तो सबसे पहले अल्ट्रासाउंड होना चाहिए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद स्वास्थ्य निदेशक डॉ. सुमन सिंह ने कहा कि समय के साथ-साथ एडवांसमेंट मेडिकल फील्ड की जरूरत है। वहीं, उन्होंने कार्यक्रम को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम डॉक्टर को ज्ञानवर्धन में लाभदायक साबित होते हैं। इस अवसर पर डॉ. नीरज कुमार, डॉक्टर पूनम कुमार, डॉक्टर पल्लव गुप्ता ने भी जानकारी दी। कार्यक्रम में डॉक्टरों ने खासतौर पर गर्भावस्था से जुड़ी कुछ गलतफहमियों को दूर करने की सलाह दी, जिसमें गर्भवती महिला को डॉक्टर से ज्यादा परिवार की नसीहतें मिलना मुख्य रूप से शामिल था।
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जेनेटिक डिफेक्ट वाले मामले में
- गर्भधारण करने से पहले विशेषज्ञ से मिले
- गर्भधारण की जानकारी होने पर कंफर्मेटरी अल्ट्रासाउंड करवाए
- 11 से 14 हफ्तों में और 19 से 20 में हफ्ते में अल्ट्रासाउंड करवाए
- एंटी स्कैन तीसरे महीने के आखिरी चरण में करवाए।
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