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चंडीगढ़: ब्रांडेड दवाओं के चक्कर में जेब खाली न करें कोरोना के मरीज, जेनेरिक दवाएं भी उतनी ही कारगर

Sat, 15 May 2021 02:22 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

ब्रांडेड और सस्ती दवाओं में कोई अंतर नहीं होता। ऐसे में जरूरी है कि मरीज स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दी जा रही जेनेरिक दवाओं पर भरोसा करें और उसका सेवन करें।
 
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दवा - फोटो : DEMO PIC
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विस्तार
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पूरे देश में कोरोना की दूसरी लहर कहर ढा रही है। वहीं कोरोना के मरीज सस्ती और महंगी दवा के कारण भ्रम में पड़ रहे हैं। आलम यह है ब्रांडेड दवा के चक्कर में अपनी जेब खाली कर रहे हैं जबकि विशेषज्ञों का कहना है कि जेनेरिक दवाएं बेहद कारगर हैं।  

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चंडीगढ़ के सेक्टर- 15 निवासी अजीत सिंह (बदला हुआ नाम) कोरोना संक्रमित हुए तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग की तरफ से एक वैलनेस किट दिया गया। किट में जरूरी दिशानिर्देश संबंधी चार्ट के साथ ही दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई थीं। लेकिन अजीत सिंह ने दवाओं की कीमत देखकर सोच लिया कि यह सस्ती दवाएं हैं, पता नहीं कितना असर करेंगी। ऐसा सोचने के बाद उन्होंने ब्रांडेड दवाएं मंगा ली और किट में दी हुई दवाओं को एक किनारे कर दिया। ठीक ऐसा ही मलोया निवासी रंजीत ने भी किया।

मत पालिए सस्ती-महंगी दवाओं का भ्रम
कोरोना संक्रमित सिर्फ ये दो मरीज ही नहीं, ऐसे तमाम मरीज है जो वेलनेस किट में दी जा रही सस्ती दवाओं को खाने से हिचकिचा रहे हैं। मरीजों का मानना है कि सरकारी सस्ती दवाएं उनके संक्रमण को कम करने में कारगर साबित नहीं होगी। सस्ती और ब्रांडेड दवाओं के बीच के अंतर के भ्रम से वे अपनी जेब हल्की कर रहे हैं।

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क्या अंतर होता है जेनेरिक व ब्रांडेड में

विशेषज्ञों की मानें तो ब्रांडेड दवाइयां निजी दवा कंपनियों द्वारा बनाई गई दवाइयां होती हैं। इसका एक विशेष नाम तय कर उसका शुल्क निर्धारित किया जाता है जबकि जेनेरिक दवाओं की कीमत को निर्धारित करने के लिए सरकार का हस्तक्षेप होता है। जेनेरिक दवाओं की मनमानी कीमत निर्धारित नहीं की जा सकती। हालांकि दोनों दवाइयों में रासायनिकगुण एक जैसे ही होते हैं। जेनेरिक दवाएं उसी नाम से जानी जाती हैं, जिस सॉल्ट से बनाई जाती है, जबकि ब्रांडेड दवाएं कंपनी द्वारा तय किए गए ब्रांड नाम से।

जेनेरिक दवाएं उच्च गुणवत्तायुक्त
जन औषधि केंद्र पर बिकने वाली जेनेरिक दवाएं उच्च गुणवत्तायुक्त होती हैं। पीजीआई में संचालित हो रहे जन औषधि केंद्र से पीजीआई भर्ती मरीजों के लिए भी दवाइयां लेता है। इससे ही इसकी गुणवत्ता का अनुमान लगाया जा सकता है। जेनेरिक दवाओं की कीमत से उसकी गुणवत्ता पर कोई असर नहीं पड़ता। इसकी कीमत सरकार जनता की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखकर तय करती है। इसलिए वह सस्ती दर पर हमें उपलब्ध हो जाती है। -प्रो. जगतराम, निदेशक पीजीआई
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जेनेरिक दवाओं के बारे में भ्रम न पालें

मरीजों को सस्ते दर पर दवाइयां उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ही जन औषधि केंद्र की स्थापना की गई है। कोरोना के मरीजों को अगर जेनेरिक दवाएं दी जा रही है तो वे कतई यह न सोचें कि इन सस्ती दवाओं से स्वास्थ्य लाभ नहीं होगा। जेनेरिक दवाओं की आपूर्ति सरकार की तरफ से होने के कारण इस पर ब्रांड और उसकी बिक्री पर आने वाले खर्च को शामिल नहीं किया जाता। इस कारण यह सस्ते दर पर लोगों को उपलब्ध हो जाती है। यह बेहद कारगर हैं। -डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य

ब्रांडेड से कमतर नहीं जेनेरिक दवाएं
जेनेरिक दवाएं किसी भी मायने में ब्रांडेड दवाओं से कमतर नहीं होती। गुणवत्ता के मामले में भी ब्रांडेड दवाओं की ही तरह कारगर होती हैं। सिर्फ उन पर ब्रांड का नाम नहीं लगा होता। ऐसे में केवल ब्रांड के चक्कर में जाकर जेनेरिक दवाओं का सेवन न करने की भूल न करें। ब्रांडेड दवाइयों की तरह जेनेरिक दवाएं भी फायदा पहुंचाती हैं। -डॉ. आरएस बेदी, सलाहकार, वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन


कोरोना के मरीजों की जरूरी दवाएं
दवा                              जेनेरिक में कीमत            ब्रांडेड में कीमत

पैरासिटामोल 10 गोली           6 रुपये                        10 रुपये
विटामिन सी 10 गोली            1 रुपये                     30 से 45 रुपये
जिंक टेबलेट                        18 रुपये                    70 से 90 रुपये
एजिथ्रोमाइसीन 3 गोली          45 रुपये                    90 से 100 रुपये
डॉक्सीसिलिन 10 गोली         16 रुपये                      70 से 90 रुपये
 
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