सेक्टर 16 जनरल हास्पिटल की डेंटल डिपार्टमेंट की ईवनिंग ओपीडी को हेल्थ सेक्रेटरी को बिना जानकारी दिए गुपचुप तरीके से बंद कर दी गई है। यह ओपीडी कई सालों से चल रही थी। इस ओपीडी को खोलने का मकसद यूटी कर्मचारियों, स्कूली बच्चे, शहरवासी और स्टाफ को इलाज उपलब्ध कराना था।
सुबह के वक्त कर्मचारी व बच्चे व्यस्त रहते थे, इसलिए शाम के वक्त उनके इलाज के लिए ओपीडी की व्यवस्था की गई थी। अचानक इस व्यवस्था के बंद होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरत की बात यह है कि इस ओपीडी को शुरू करने के आदेश ऊपर से आए थे, लेकिन अब अथॉरिटी को बिना जानकारी दिए ओपीडी को बंद कर दिया गया। जांच में यह भी बात सामने आई है कि पहले ओपीडी का समय दोपहर दो से आठ बजे तक था। बाद में दो घंटे कम कर दिया गया।
पांच में से चार मशीने खराब, डाक्टर भी खाली
डेंटल ओपीडी में पांच में से चार चेयर सालों से खराब है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। एक चेयर होने के कारण मरीजों को घंटों इलाज के लिए इंतजार करना पड़ता है। दूसरी तरफ विभाग में कुल छह डाक्टर है। एक डाक्टर को मौलीजागरा जाना पड़ता है, जबकि बाकी डाक्टर डेंटल चेयर खराब होने के कारण खाली रहते हैं।
यदि डेंटल चेयर ठीक रहती तो वे मरीजों का इलाज करते। हेल्थ सर्विसेस के डायरेक्टर एसके भल्ला ने पद ज्वाइन करते ही एलान किया था कि एक महीने के भीतर डेंटल चेयर आ जाएगी, लेकिन अब इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है।
डेंटल ओपीडी में गड़बड़झाला
जनरल हास्पिटल की सभी ओपीडी में डाक्टरों के पास एक रजिस्टर होता है। उसमें डाक्टर रिकार्ड मेन्टेंन करते हैं कि उन्होंने कितने मरीज देखे, लेकिन डेंटल ओपीडी में ऐसा कोई रजिस्टर नहीं है। पता ही नहीं चलता कि किस डाक्टर ने कितने मरीज देखे?
जब डाक्टरों का परफार्मेंस रिकार्ड ही नहीं है तो उनकी एसीआर (एनुअल कांफिडेंस रिपोर्ट) कैसे तैयार की जाती है। हैरत की बात यह है कि आज तक इस बारे में हायर अथॉरिटी ने कुछ पूछताछ तक नहीं की। कुछ ने आरोप लगाया कि डिपार्टमेंट की एक्टिंग एचओडी की दखलअंदाजी से रजिस्टर नहीं रखा गया है।
कोट
मुझे इस बारे में जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो इस बारे में अधिकारियों से पूछा जाएगा कि आखिर ईवनिंग ओपीडी बंद करने के क्या कारण थे?
अनिल कुमार, हेल्थ सेक्रेटरी चंडीगढ़