हरियाणा की पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल ने प्रदेश में जाट आरक्षण आंदोलन से हुए नुकसान के लिए पुलिस की ढीली कार्रवाई को जिम्मेवार ठहराया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि झज्जर में हुई हिंसा और लूटपाट के दौरान पुलिस कंट्रोल रूम को दी गई अधिकतर शिकायतों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि अगर कार्रवाई हुई भी तो धीमी, जिससे आम लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
उन्होंने आरोप लगाया कि हालात से निपटने की बजाय पुलिस कर्मी अपनी वर्दियां बदलकर सादे लिबास में घूम रहे थे। भुक्कल ने बुधवार को संवादताओं से बातचीत में कहा था कि कई पीड़ित परिवारों को राहत मिलने में देरी हुई। चाहे आग बुझाने की बात हो या पुलिस की ओर से मिलने वाली मदद, इसमें कोताही बरती गई। उन्होंने बताया कि फायर कर्मी भी इस दौरान अपनी ड्यूटी निभाने से बच रहे थे, नतीजतन नुकसान और अधिक हुआ।
अगर पुलिस और फायर कर्मी हालात पर काबू करने में मुस्तैदी दिखाते तो काफी हद तक जानमाल का नुकसान कम हो सकता था। उधर, जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान पुलिस कर्मियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली और हिंसा के दौरान उनकी भूमिका की जांच कर रही कमेटी भी प्रभावित जिलों में दौरा कर ऐसी शिकायतों पर सुनवाई कर रही है। इस दौरान लापरवाही या ड्यूटी से हटकर किसी वर्ग का सहयोग करने के मामलों की भी जांच चल रही है।
जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस या किसी भी अन्य के दोषी मिलने पर उसे बख्शा नहीं जाएगा। अगर फायर कर्मियों ने कोताही बरती है और लोगों को राहत देने में पीछे रहे, तो इससे जुड़े सभी पहलुओं की छानबीन कर कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।
-प्रकाश सिंह, जांच कमेटी के अध्यक्ष एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व डीजीपी