चंडीगढ़। शहर में रह रहे करीब छह हजार ट्रांसजेंडरों के लिए राहत भरी खबर है। चंडीगढ़ प्रशासन ने इस समुदाय से जुड़े लोगों के कल्याण को लेकर कसरत शुरू कर दी है। यूटी प्रशासन ने ट्रांसजेंडरों के लिए गरिमा गृह या शेल्टर होम बनाने के लिए जगह तलाशने के निर्देश जारी किए हैं। ट्रांसजेंडर के लिए अधिकारों का संरक्षण अधिनियम-2019 में उल्लिखित प्रावधानों को देखते हुए इनके सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों के सभी सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों की एक बैठक गृह सचिव नितिन कुमार यादव की अध्यक्षता में हुई। इसमें ट्रांसजेंडरों के कल्याण से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई।
मौके पर समाज कल्याण, महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक ने ट्रांसजेंडरों के कल्याण के लिए प्रशासन द्वारा किए गए कार्यों पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। समाज कल्याण सचिव ने मुख्य वास्तुकार को केंद्र सरकार के निर्देशानुसार ट्रांसजेंडरों के लिए गरिमा गृह/शेल्टर होम के निर्माण को लेकर शीघ्र भूमि के आवंटन के लिए एक तंत्र स्थापित करने का निर्देश दिया।
बैठक के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि ट्रांसजेंडरों को पहचानपत्र जारी करने के लिए पुलिस सत्यापन अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा प्रस्ताव रखा गया कि विशेष रूप से चिकित्सा उपचार और सर्जरी के लिए आयुष्मान भारत योजना के तहत वित्तीय सहायता का लाभ उठाने के लिए मामला पीजीआई, चंडीगढ़ को शामिल करने के लिए भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के साथ उठाया जाए।
किफायती किराया आवासीय योजना के तहत ट्रांसजेंडरों को मकान आवंटन के संबंध में भी विचार-विमर्श भी हुआ। बैठक में ट्रांसजेंडरों की आवश्यकताओं और परिस्थितियों पर विचार करते हुए उनके लिए पर्याप्त आवास विकल्प सुनिश्चित करने के संभावित रास्ते तलाशे गए।