फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एकांतवास में रह रहे लोगों के घरों से नहीं उठ रहा कूड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
चंडीगढ़। शहर में घरों में एकांतवास में रह रहे लोगों को समय पर जांच रिपोर्ट न मिलने और कूड़ा न उठने से मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। सहायता नंबर पर शिकायत सुनने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने पर लोग पार्षद से गुहार लगा रहे हैं। निगम की ओर से जारी व्हाट्सएप नंबर पर पार्षदों की ओर से वर्तमान में ऐसी समस्याओं की संख्या बढ़कर 80 से 100 तक पहुंच गई है।
विज्ञापन

कोरोना जांच के लिए नमूने देने के बाद 24 से 48 घंटे में रिपोर्ट देने का नियम है, लेकिन लोगों को 4 दिनों तक रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है। ऐसे में एकांतवास में रह रहे लोग तनाव में रहते हैं कि वे संक्रमित हैं या नहीं। वहीं कुछ लोगों के घरों में काम करने वाले कर्मचारी भी कोरोना के लक्षण दिखने पर अपने नमूने दे आते हैं, लेकिन उनकी रिपोर्ट भी समय पर नहीं मिल पाती है। ऐसे में लोगों को पता नहीं चलता कि वे स्वयं को एकांतवास में रखें या जांच कराएं अथवा नहीं।
वहीं नगर निगम के कामकाज की स्थिति भी ठीक नहीं है। पहले जहां बिना किसी सिफारिश के एकांतवास में रह रहे लोगों के घरों से कूड़ा उठ जाता था, वहीं अब पार्षदों से फोन लगवाना पड़ रहा है। कर्मचारी चार दिनों तक कूड़ा उठाने नहीं आते हैं। इस कारण एक कमरे में बंद व्यक्ति को कूड़े के साथ रहना किसी सजा से कम नहीं लगता। नगर निगम ने अधिकारियों व पार्षदों का एक आंतरिक व्हाट्सएप समूह बनाया हुआ है। पार्षदों को इस पर क्षेत्रीय लोगों की समस्या डालनी होती है, तब समस्या का समाधान होता है। इससे लोगों में अब सिफारिश कल्चर बढ़ रहा है।
विज्ञापन

पिछले साल बनाया था समूह, घट गई थीं समस्याएं
पिछले साल नगर निगम ने यह व्हाट्सएप समूह बनाया था। तब पार्षदों की ओर से इस समूह की सराहना की गई थी। वहीं समस्या का तत्काल समाधान होने पर लोगों को भी सहूलियत होती थी। बीच में केस कम हुए तो समस्याएं भी न के बराबर आने लगीं। मार्च से अचानक इस समूह में समस्याओं की संख्या में उछाल आया। अब प्रतिदिन 100 समस्याएं समूह में आ जाती हैं।
सहायता नंबर पर टाल दिया जा रहा मामला
लोगों ने बताया कि निगम की ओर से जारी किए गए सहायता नंबर पर फोन करने पर बताया जाता है कि समस्या को संबंधित विभाग को भेज दिया है, लेकिन उसका निस्तारण समय से होता ही नहीं। जब लोग फिर से सहायता नंबर पर फोन करते हैं तो बताया जाता है कि उन्होंने शिकायत संबंधित विभाग को भेज दी है। समस्या का निस्तारण हो जाएगा।
बातचीत
एक सप्ताह से कोई कूड़ा उठाने नहीं आया
मेरे घर की पहली मंजिल पर एक संक्रमित परिवार है। एक परिवार मेरे घर के सामने संक्रमित है। एक सप्ताह हो गया कोई भी कूड़ा उठाने नहीं आया। हेल्पलाइन नंबर पर कोई जवाब नहीं मिलता। फिर जाकर पार्षद को मैसेज किया, लेकिन अभी भी कोई कूड़ा उठाने नहीं आया है। -धर्मेंद्र सिंह रंधावा, सेक्टर-43बी
छह दिन बाद मिली रिपोर्ट
मैंने और मेरी पत्नी ने कोरोना जांच करवाई थी। 48 घंटे बीतने के बाद भी हमारी रिपोर्ट ही नहीं आई। हमने लगातार प्रशासनिक व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया, लेकिन रिपोर्ट आने में छह दिन लग गए। छह दिन बाद मुझे संक्रमित होने का पता चला। -आनंद रोहिल्ला, निवासी सेक्टर-22
कोट::
हमारा प्रयास रहता है कि प्रत्येक समस्या का निराकरण हो सके, इसलिए लोगों और जनप्रतिनिधियों से लगातार संपर्क बनाकर रखते हैं। इसके लिए हेल्पलाइन नंबर बनाए गए हैं। कुछ घर हो सकते हैं, वहां दिखवा लेंगे। -सौरभ अरोड़ा, संयुक्त आयुक्त, निगम
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें