एचएमटी पिंजौर का भविष्य अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हां और न पर टिका है। यह संकेत केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव गिरीश शंकर ने एचएमटी कार्मिक संघ के पदाधिकारियों बैठक के दौरान दिए हैं। पिंजौर एचएमटी यूनिट को लेकर बुधवार से वीरवार तक तीन हाईप्रोफाइल बैठक दिल्ली उद्योग मंत्रालय ज्वाइंट सेक्रेटरी और सेक्रेटरी के साथ हुई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण वीरवार को हुई बैठक को माना जा रहा है।
बैठक में सेक्रेटरी ने कार्मिक संघ को स्पष्ट किया है कि एचएमटी पिंजौर यूनिट चलेगी या नहीं, इसका अंतिम फैसला प्रधानमंत्री को लेना है। वहीं पिछले 20 माह की सैलरी रिलीज करने के लिए भी केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय को पीएमओ के आदेश का इंतजार है। अगर पीएमओ का आदेश मिलता है तो मंत्रालय एक सप्ताह के भीतर सैलरी रिलीज कर देगा।
कार्मिक संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि मंत्रालय के सचिव से शिष्टमंडल के साथ करीब 15 मिनट प्रमुख दोनों मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के दौरान 28 अप्रैल को एचएमटी परिसर में 45 फुट ऊंची पानी की टंकी से कूदकर आत्महत्या करने वाले ज्वाइंट जनरल मैनेजर कंवलजीत सिंह नागी का मामला भी सामने रखा गया। बातचीत के दौरान केंद्रीय भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव को स्पष्ट किया गया है कि पिंजौर यूनिट में स्थिति काफी तनावपूर्ण है।
यदि जल्द फैसला नहीं लिया गया तो स्थिति अनियंत्रित हो सकती है। यहां कार्यरत स्टाफ और उनके परिवार वाले आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं। दिल्ली में मौजूद संघ के अध्यक्ष महेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार को मंत्रालय के सचिव से हुई बातचीत में पिंजौर यूनिट को चलाने संबंधित उनका रवैया सकारात्मक नहीं दिखा। उन्होंने इस मुद्दे पर यूनिट का भविष्य सीधे पीएम की हां और ना पर टिका होने की बात कही है।