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स्वच्छता एप के नाम पर लोगों से हो रहा मजाक, कचरा हटाया नहीं और कहते हैं काम हो गया

Mon, 14 Jan 2019 04:19 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कूड़ा कर्कट
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सफाई, रोशनी सहित नागरिकों की अन्य समस्याएं दूर करने के लिए शुरू किए गए स्वच्छता एप को लेकर लोगों के साथ मजाक किया जा रहा है। पूरा चंडीगढ़ शहर स्वच्छता के बैनरों से पटा पड़ा है। हर बैनर पर स्वच्छता एप का जिक्र है, लेकिन नगर निगम एप पर आने वाली शिकायतों को लेकर गंभीर नहीं है। ऐसा लगता है मानों केंद्र सरकार को दिखाने के लिए शहर में महज स्वच्छता का दिखावा किया जा रहा है। एप पर आ रही शिकायतों का किस तरह से निपटारा किया जा रहा है, इसका अमर उजाला ने रिएलिटी चेक किया। जो बात सामने आई वह हैरान करने वाली थी।
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दरअसल, बीते काफी दिनों से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड की मेन एंट्री से थोड़ा आगे जाकर कचरा पड़ा था। नगर निगम के सफाई कर्मचारी आते तो रोजाना हैं, लेकिन पहले से पड़े कचरे में और कूड़ा फेंक जाते। 10 जनवरी को स्वच्छता एप पर फोटो के साथ इसकी शिकायत दर्ज की गई। करीब 16 घंटे बाद एप पर नोटिफिकेशन आया 'Resolved' लेकिन मौके पर जाकर देखा गया तो कचरा जस का तस पड़ा था। शहर का ऐसा हिस्सा, जहां पुलिस मुख्यालय, सचिवालय, हाउसिंग बोर्ड और अन्य महत्वपूर्ण मुख्यालय हैं, वहां नगर निगम की ऐसी हरकत उसकी कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करती है।

हर 5 मिनट में एप पर आ रही शिकायत
पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान शहर के बहुत से लोगों ने स्वच्छता एप को डाउनलोड किया था। लिहाजा अब औसतन हर 5 मिनट में एप पर एक शिकायत दर्ज की जा रही है।
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क्या है स्वच्छता एप
स्वच्छता एप आप अपने मोबाइल के प्ले स्टोर में जाकर डाउनलोड कर सकते हैं। डाउनलोड करने के बाद एप आपकी लोकेशन और मोबाइल नंबर पूछेगा। इसके बाद यह चालू हो जाएगा। इसमें आप अपने गली-मोहल्ले में फैली गंदगी की फोटो अपलोड कर सकते हैं। नगर निगम 24 घंटे के भीतर इसकी सफाई सुनिश्चित करवाएगा। स्वच्छता सर्वे में बाकायदा नगर निगम को इसके अंक मिलेंगे। इसी के आधार पर शहर की स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग तय होनी है।

हाईकोर्ट में एक महीने से खुलने के इंतजार में हैं डस्टबिन
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के पास पिछले महीने बहुत से नए डस्टबिन लगाए गए। अभी तक ये डस्टबिन किसी के द्वारा उद्घाटन का इंतजार कर रहे हैं। करीब महीना हो गया, लेकिन ज्यादातर डस्टबिन प्लाटिक के लिफाफों में पैक हैं। हालांकि सभी को जगह पर रख दिया गया है, लेकिन लापरवाही की हद है कि कवर को नहीं हटाया जिससे लोग डस्टबिन के नीचे कूड़ा फेंक रहे हैं।

हाईकोर्ट की पार्किंग में बेतरतीब ढंग से लगाए गए इन डस्टबिनों में सूखा व गीला कचरा अलग-अलग रखने की व्यवस्था तो है लेकिन जब इनका कवर ही नहीं निकाला गया तो कोई कैसे कूड़ा फेंके। हैरानी की बात है कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जहां रोजाना करीब साढ़े 5 हजार केस लगते हैं और हजारों की संख्या में वकील व कर्मचारी पहुंचते हैं लेकिन निगम के किसी भी अधिकारी की नजर इन पर नहीं पड़ रही।

स्वच्छता एप पर आने वाली शिकायतों का किस तरह से निपटारा किया जा रहा है, इसकी मैं पूरी तरीके से निगरानी करता हूं। हालांकि अगर कोई ऐसी लापरवाही हुई है तो इसकी जांच की जाएगी।
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- केके यादव, आईएएस कमिश्नर, नगर निगम
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