चंडीगढ़। वारंटी अवधि में खराब हुए फ्रिज की समस्या दूर नहीं करना व्हर्लपूल इंडिया लिमिटेड को भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार माना है। आयोग ने कंपनी को फ्रिज की खराबी दूर कर उसे चालू हालत में शिकायतकर्ता को सौंपने के आदेश दिए हैं। साथ ही मानसिक परेशानी, उत्पीड़न और मुकदमेबाजी के खर्च के लिए 10 हजार रुपये एकमुश्त देने के निर्देश दिए हैं।
डेराबस्सी निवासी गुरबचन सिंह ने आयोग में शिकायत देकर बताया था कि उन्होंने 11 अक्तूबर 2022 को 49,139 रुपये में व्हर्लपूल का फ्रिज खरीदा था। खरीद के समय पांच साल की वारंटी दी गई थी। मई 2024 में फ्रिज की कूलिंग में समस्या शुरू हुई और बाद में उसने ठीक से काम करना बंद कर दिया। उन्होंने 27 मई को शिकायत दर्ज कराई, लेकिन करीब 12 से 15 दिन तक तकनीशियन जांच के लिए नहीं पहुंचा। इसके बाद 12 और 17 जून को भी शिकायत की गई। तकनीशियनों ने कुछ अस्थायी उपाय किए, लेकिन समस्या दोबारा सामने आ गई।
दरवाजा बदलने के नाम पर लिए 1500 रुपये
गुरबचन सिंह के अनुसार, तकनीशियनों ने गर्मी का हवाला देते हुए फ्रिज के पास पंखा चलाने जैसी सलाह दी। बाद में दरवाजा बदलने के नाम पर उनसे 1500 रुपये एडवांस लिए गए, लेकिन न नया दरवाजा उपलब्ध कराया गया और न सेंसर दिया गया। कई बार शिकायत के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। परेशान होकर उन्होंने 16 अक्तूबर 2024 को कंपनी को कानूनी नोटिस भेजा।
मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट का सबूत नहीं दे सके
कंपनी ने दलील दी कि शिकायतकर्ता मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट साबित करने के लिए विशेषज्ञ या लैब रिपोर्ट पेश नहीं कर सके। आयोग ने फ्रिज बदलने या पूरी कीमत लौटाने की मांग खारिज कर दी। हालांकि, वारंटी में बार-बार शिकायत के बावजूद खराबी दूर नहीं करने को सेवा में कमी मानते हुए कंपनी को फ्रिज ठीक करने और 10 हजार रुपये देने के आदेश दिए।