नेता सुभाष चंद्र बोस के सुरक्षा कर्मी रहे बचन सिंह के बेटे सरवन सिंह ने शुक्रवार को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सम्मान लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद बीस के करीब स्वतंत्रता सेनानियों ने पंजाब सरकार पर मांगें न मानने का आरोप लगाकर समागम का बायकॉट कर दिया और स्टेडियम से बाहर आ गए। कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ध्वजारोहण करने आए थे। सरवन सिंह ने बताया कि उसके पिता गांव चाऊके निवासी बचन सिंह नेता सुभाष चंद्र बोस के सुरक्षा कर्मी थी और उन्होंने देश की आजादी के लिए अपनी कुर्बानी दी थी।
प्रशासन ने उनके परिवार का फ्रीडम फाइटर का कार्ड तो बना दिया, लेकिन जो सुविधा उन्हें मिलनी चाहिए वो प्रशासन नहीं दे रहा है। इसके अलावा उनकी किसी भी कार्यालय में उनकी कोई सुनवाई नहीं होती। उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता सेनानी परिवारों ने अपनी पेंशन लगवाने, तीन सौ यूनिट बिजली माफ करने, बिजली मीटर का किलोवाट कम करने, बसों के पास आदि पांच मांगों को लेकर संगरूर में धरना लगाया था। जिला प्रशासन एवं सरकार के प्रतिनिधियों ने यह आश्वासन देकर धरना समाप्त करवा दिया था कि उनकी मांगों संबंधी सर्कुलर 15 अगस्त को उन्हें दे दिया जाएगा।
प्रशासन ने आज भी उनके साथ धोखा किया। इस पर उन्हें समागम का बायकॉट करने के लिए मजबूर होना पड़ा। सरवन सिंह ने आरोप लगाया कि जब 26 जनवरी और 15 अगस्त के समागम में ही जिला प्रशासन स्वतंत्रता सेनानी परिवारों का याद करता है। इससे आगे पीछे कभी भी प्रशासन उनके परिवारों की सुध नहीं लेता। अगर सरकार एवं प्रशासन ने उनकी मांगों की तरफ अभी भी ध्यान नहीं दिया तो वह 26 जनवरी 2020 को होने वाले समागम का भी बायकॉट करके बडे़ स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
स्वतंत्रता दिवस के जिलास्तरीय समागम में शुक्रवार को मुख्य मेहमान सूबे के पंचायत ग्रामीण विकास मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इसके बाद उन्होंने परेड निरीक्षण कर सलामी ली। स्कूली बच्चों ने झांकियां पेश कीं। वहीं जिला प्रशासनिक अधिकारियों ने उन दिव्यांग व्यक्तियों को ट्राईसाइकिल बांटी, जिन के नाम लिस्ट में थे। जिला प्रशासन की तरफ से बठिंडा अमृतसर नैशनल हाईवे पर बने चौक में तिरंगे झंडे लगवाए गए। झंडों में से अशोक चक्र गायब था। जब डिप्टी कमिशनर बी श्रीनिवासन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि वो जांच कराएंगे कि किसी अधिकारी ने अपनी ड्यूटी में कोताही की है।