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जन्म लेते ही पता चलेगा, कितना स्वस्थ है बच्चा

Tue, 25 Nov 2014 03:59 PM IST
दीपक शाही/अमर उजाला, पंचकूला
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अब जनरल अस्पताल में बच्चों के जन्म लेते ही उनके मेटाबोलिक डिसऑर्डर का पता चल सकेगा। यह टेस्ट फ्री है। फिलहाल, ट्रायल बेस पर इसकी शुरुआत की गई है और 10 से 15 दिनों के अंदर प्रॉपर तरीके से इस पर काम शुरू हो जाएगा।
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दरअसल, जन्म के बाद बच्चों में होने वाली बीमारियों की जांच के लिए मेडिकल स्क्रीनिंग शुरू की गई है। इसके तहत जन्म के 24 से 48 घंटे के भीतर बच्चों का ब्लड सैंपल लेकर स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए जीएमसीएच भेजा जाता है। पहले चरण में तीन तरह के टेस्टों के लिए सैंपल भेजे जा रहे हैं।

बाद में छह तरह के मेटाबोलिक डिसआर्डर का स्क्रिीनिंग टेस्ट कराया जाएगा। अब तक करीब 400 बच्चों के ब्लड सैंपल जीएमसीएच भेजे गए हैं, जिनमें चार की रिपोर्ट पॉजीटिव आई है। इन बच्चों को दोबारा टेस्ट के लिए बुलाया गया है। वहीं, नवजात बच्चों की जिन गंभीर बीमारियों का जनरल अस्पताल में इलाज संभव नहीं है, उसके लिए प्रदेश सरकार की तरफ से एम्स और पीजीआई से भी बातचीत हो चुकी है। जल्द ही इसे अमलीजामा पहनाया जाएगा।
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कालका और रायपुररानी में भी मिलेगी सुविधा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा की तरफ से जनरल अस्पताल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत मेटाबोलिक डिसऑर्डर टेस्ट शुरू किया गया है। इसके सफल होने के बाद एक माह के अंदर कालका और रायपुररानी के सीएचसी में भी यह सुविधा मुहैया कराई जाएगी। इसके बाद अंबाला और रायपुरानी के जिला अस्पतालों में यह सुविधा दी जाएगी।

छह तरह के मेटाबोलिक डिसआर्डर की स्क्रीनिंग
- कंजेनाइटल हाइपोथाइरिज्म
- कंजेनाइटल एडरनल हाइपोथाइरिज्म
- जी सिक्स पीडी
- पीकेयू
- गॉल्ट
- बायोटेंडेज

एड़ी से लिए जाते हैं ब्लड सेंपल
बच्चे के जन्म के 24 से 48 घंटे के भीतर एड़ी से ब्लड का एक बूंद फिल्टर पेपर पर लिया जाता है। उसे सुखाने के बाद सैंपल को जीएमसीएच भेजा जाता है।  

कोट्स
छह तरह के मेटाबोलिक डिसआर्डर के स्क्रिीनिंग टेस्ट के लिए सैंपल जीएमसीएच भेजे जा रहे हैं। इसकी शुरुआत हो चुकी है।
- डॉ. सुरेश दलपत, डिप्टी डायरेक्टर चाइल्ड हेल्थ, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन हरियाणा

अभी नवजातों से लिए गए सैंपल को तीन तरह के टेस्ट के लिए जीएमसीएच भेजा जा रहा है। अब तक करीब चार सौ बच्चों का सैंपल भेजा जा चुका है।
- डॉ. अशोक गोयल, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल अस्पताल

इनके लिए भेजे गए थे सैंपल
कंजेनाइटल हाइपोथाइरिज्म
इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास संभव नहीं है। इसमें पीलिया की भी शिकायत आती है। बच्चों के जन्म के समय ही बीमारी को डायग्नोज कर लिया जाए तो उपचार से बच्चा नार्मल हो सकता है। अगर सही समय पर पता नहीं चला तो बच्चा शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग हो सकता है।

जी सिक्स पीडी
शरीर में बहुत सारे एंजाइम होते हैं, जो हार्मोनल और एंजाइमेटिक को कंट्रोल करती है। शरीर में इस एंजाइम की कमी होने पर कुछ खाद्य पदार्थ और दवाएं मरीज को नहीं दी जाती है। अगर इस बीमारी के बारे में जन्म के एक सप्ताह के अंदर पता नहीं लग पाया तो बच्चे की जान भी जा सकती है और आगे बच्चा सेक्सुअल एबनार्मल भी हो सकता है।
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कंजेनाइटल एडरनल हाइपोथाइरिज्म
इस बीमारी से पीड़ित बच्चों का भी शारीरिक व मानसिक विकास रुक जाता है।
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