हरियाणा सरकार ने सरकारी अस्पतालों व चिकित्सा संस्थानों में भर्ती होने वाले एक वर्ष तक के बीमार नवजात शिशु और उसकी मां को निशुल्क आहार उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, नवजात शिशु को उपचार, जांच, रक्तदान और रेफरल सेवाएं भी निशुल्क दी जाएंगी।
यह जानकारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के मिशन निदेशक डा. राकेश गुप्ता ने यहां प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल तथा किशोर स्वास्थ्य दृष्टिकोण पर चिकित्सा महाविद्यालयों के लिए राज्य स्तरीय ओरिएंटेशन वर्कशाप को संबोधित करते हुए दी।
उन्होंने बताया कि ‘जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम’ के तहत बीमार नवजात शिशुओं को जन्म के एक माह तक निशुल्क उपचार सुविधाओं का प्रावधान है। हरियाणा में यह लाभ एक वर्ष तक की आयु के बच्चों को दिया जाएगा। इसके अलावा, भर्ती होने वाले बीमार नवजात शिशु की मां को भी निशुल्क आहार दिया जाएगा।
मेडिकल कालेजों को चिकित्सा सेवाओं के निर्देश
डा. गुप्ता ने सभी चिकित्सा महाविद्यालयों को ‘जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम’ के तहत मातृ एवं शिशु चिकित्सा देखभाल सेवाओं को सुनिश्चित बनाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि सभी महाविद्यालय गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था की पहली जांच से लेकर प्रसवोत्तर जटिलताओं तथा नवजात शिशु के पैदा होने के एक वर्ष तक निशुल्क और कैशलेस उपचार सुविधाएं मुहैया करवाएं।
उन्होंने निर्देश दिये कि आपात मामलों में दवा या अन्य वस्तुओं की आवश्यकता होने पर प्रसूति कक्ष के प्रभारी को पर्याप्त धन उपलब्ध हो। जिससे दवा या अन्य जरूरी वस्तुओं की कमी होने पर मौके पर व्यवस्था की जा सके।