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पहल, यहां पर अब मुफ्त होगा डाउन सिंड्रोम टेस्ट

Sun, 22 Mar 2015 02:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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एक मई से चंडीगढ़ के सभी सरकारी अस्पतालों और पॉलीक्लीनिक में प्रेग्नेंट महिलाओं की डाउन सिंड्रोम की जांच मुफ्त की जाएगी। शनिवार को चंडीगढ़ में डाउन सिंड्रोम फ्री सिटी प्रोग्राम की लॉन्चिंग की गई। इसी के साथ ही चंडीगढ़ देश का ऐसा पहला शहर बन गया है, जहां पर यह प्रोग्राम शुरू किया गया है।
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चंडीगढ़ के जीएमसीएच 32 में पिछले आठ साल से प्रेग्नेंट महिलाओं की जांच चल रही थी, जबकि जीएमएसएच 16 में तीन दिन पहले यह प्रोग्राम लॉन्च किया गया। पीजीआई में इसकी जांच फिलहाल नहीं हो पाएगी, लेकिन पीजीआई में रुटीन चेकअप कराने वाली महिलाओं के सैंपल जीएमएसएच 16 में भेजे जाएंगे।

चंडीगढ़ के होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल ने आईएमए को पत्र लिखकर प्राइवेट हास्पिटलों में डाउन सिंड्रोम की जांच अनिवार्य करने को कहा है। इसकी लॉन्चिंग के दौरान एडवाइजर विजय कुमार देव, होम सेक्रेटरी अनुराग अग्रवाल, डायरेक्टर प्रिंसिपल प्रोफेसर अतुल सचदेवा और बीएस चवन की मौजूदगी में की गई।
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10 हफ्ते में डाउन सिंड्रोम की जांच जरूरी

जीएमसीएच 32 के साइक्रेट्री डिपार्टमेंट के हेड डा. बीएस चवन ने बताया कि यह जांच प्रेग्नेंसी के 10 हफ्ते के भीतर कराना जरूरी होता है। जांच में पता चलता है कि गर्भ में पल रहा बच्चा पैदा होने के बाद डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होगा या नहीं।

टेस्ट के बाद यदि पता चल जाता है कि आने वाला बच्चा डाउन सिंड्रोम से पीड़ित होगा तो अबॉर्र्शन कराने के लिए स्वतंत्रता होती है। यदि टेस्ट नहीं कराया और बच्चा डाउन सिंड्रोम से ग्रसित पैदा होता है तो बच्चे का मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है।

क्या होता है डाउन सिंड्रोम
डाउन सिंड्रोम बच्चों की एक गंभीर समस्या है, जिससे उनका शारीरिक विकास आम बच्चों की तरह नहीं हो पाता। उनका दिमाग भी सामान्य बच्चों की तरह काम नहीं करता। कई बार उनके व्यक्तित्व में कुछ विकृतियां दिखाई देती हैं। लेकिन प्यार और अच्छी देखभाल से ऐसे बच्चों को सामान्य जीवन दिया जा सकता है।
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ऐसे होता है डाउन सिंड्रोम

यह एक आनुवंशिक समस्या है, जो क्रोमोसोम की वजह से होती है। गर्भावस्था में भ्रूण को 46 क्रोमोसोम मिलते हैं, जिनमें 23 माता और 23 पिता के होते हैं, लेकिन डाउन सिंड्रोम पीड़ित बच्चे में 21वें क्रोमोजोम की एक प्रति (कॉपी) ज्यादा होती है। यानी उनमें 47 क्रोमोसोम पाए जाते हैं, जिससे उसका मानसिक और शारीरिक विकास धीमा हो जाता है। इससे कई समस्याएं हो जाती हैं। यह समस्या लड़कों में ज्यादा देखने को मिलती हैं।

ये होते हैं डाउन सिंड्रोम के लक्षण
1.कई बच्चों के चेहरों पर विशिष्ट लक्षण देखने को मिलते हैं। जैसे कान छोटे होना, चेहरा सपाट होना, आंखों के ऊपर तिरछापन होना, जीभ बड़ी होना आदि।
2.डाउन सिंड्रोम पीडित बच्चों की रीढ़ की हड्डी में भी विकृति हो सकती है। कुछ बच्चों को पाचन की समस्या भी हो सकती है तो कई बच्चों को किडनी संबंधित परेशानी हो सकती है।
3.इनकी सुनने-देखने की क्षमता कम होती है।
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