फर्जी कागजातों के आधार पर गाड़ी रजिस्टर्ड करवाने के मामले में विजिलेंस ने एक बड़ा खुलासा किया है। विभाग के अनुसार गाड़ी पास करवाने के लिए जालसाजों ने मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के फर्जी हस्ताक्षर तक कर डाले।
विजिलेंस विभाग ने रजिस्ट्रेशन एंड लाइसेंसिंग अथॉरिटी (आरएलए) में फर्जी कागजात जमा कर गाड़ियों की आरसी बनाने का भंडाफोड़ किया है। इसके तहत विजिलेंस ने अब तक फर्जी कागजों के आधार पर गाड़ियों की आरसी बनाने के आरोप में तीन लग्जरी गाड़ियां जब्त की हैं। विभाग एक गाड़ी की और जांच कर रहा है। जल्द ही उसको भी जब्त किया जाएगा।
विजिलेंस विभाग ने इस फर्जीवाड़े में एक बड़ा खुलासा करते हुए डीएसपी सुखराज कटेवा ने बताया कि गाड़ियों को पास करवाने लिए मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर तक के फाइल पर जाली साइन किए गए हैं। इस बात का खुलासा तब हुआ जब विजिलेंस ने जब्त की गाड़ियों की फाइलों पर जिन अफसरों के हस्ताक्षर थे, उनसे पूछताछ की। उन्होंने कहा कि ये उनके साइन हैं ही नही। ये उनके फर्जी साइन किसी और ने किए हैं। उन्होंने तो इन फाइलों पर कभी साइन ही नहीं किए।
गिरफ्तारी में जल्दबाजी नहीं करना चाहते
विजिलेंस विभाग ने तीन गाड़ियां जब्त कर ली हैं और अभी तक मामले में किसी दलाल, कार मालिकों या आरएलए से किसी कर्मचारी को गिरफ्तार नहीं किया है। डीएसपी विजिलेंस का कहना है कि गिरफ्तारी करने में वह जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहते। जब विजिलेंस के पास आरोपियों के खिलाफ पूरे सबूत होंगे गिरफ्तारी की जाएगी, ताकि उनके पास बचने का कोई रास्ता न बचे या कोर्ट में सरकारी केस कमजोर न पड़े।
टैक्स बचाने के लिए लग्जरी कारों का कम रेट दिखाया
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- फोटो : demo pic
विजिलेंस ने जाली कागजातों के आधार पर अब तक दो बीएमडब्ल्यू और एक मर्सिडीज कार जब्त की गई है। ये तीनों ही गाड़ियां फर्जी बिलों, जाली पते पर रजिस्टर्ड हुई थीं। जालसाजों ने गाड़ियों की आधी कीमत के बिल आरएलए में जमा कर आरसी बनवाई थी। इससे कार मालिकों ने आरएलए को लाखों रुपये की चपत लगाई थी।
एड्रेस प्रूफ भी गलत
बीएमडब्ल्यू कार की कीमत करीब 58 लाख रुपये थी, लेकिन जालसाजों ने 30 लाख रुपये के ही बिल फाइल के साथ लगाए। मर्सिडीज की कीमत 60 लाख थी, तो 26 लाख रुपये के बिल दिखाकर कारें रजिस्टर्ड करवाईं। इनकी जांच करने पर विभाग के सामने आया कि एड्रेस प्रूफ भी रजिस्ट्रेशन में गलत लगाए गए थे।
कर्मचारी की मिलीभगत के बिना संभव नहीं
विजिलेंस विभाग भी मान रहा है कि बिना किसी अंदर के कर्मचारी कि मिलीभगत के ये खेल संभव नहीं है। विभाग अभी जांच कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि फाइलों पर जिस किसी के साइन हैं, सभी से पूछताछ की जा रही है। गाड़ी पास करने केसमय जो कर्मचारी फोटो खींचता है और फीस काउंटर पर बैठने वाले क्लर्क तक सभी से पूछताछ हो रही है। जिस किसी आरएलए कर्मचारी के भी इस खेल में हाथ होने के सबूत मिले उसको गिरफ्तार किया जाएगा।